POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत

  • POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज प्रयागराज POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अग्रिम जमानत दे दी है।

    इससे पहले 27 फरवरी को जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था और निर्देश दिया था कि अंतिम फैसला होने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की गिरफ्तारी न की जाए।

    गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप है कि प्रयागराज में आयोजित हालिया माघ मेला के दौरान नाबालिगों के साथ यौन शोषण किया गया।

    इस मामले में FIR 21 फरवरी को प्रयागराज के झूंसी थाना में रात 11:37 बजे दर्ज की गई थी। यह FIR प्रयागराज की विशेष POCSO कोर्ट द्वारा संबंधित SHO को तत्काल मामला दर्ज करने के निर्देश देने के कुछ घंटों बाद दर्ज हुई।

    FIR में POCSO एक्ट की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें धारा 3, 5(l), 4(2), 6, 16, 17 और 51 शामिल हैं। विशेष रूप से धारा 5(l) सहपठित धारा 6 के तहत नाबालिग के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए न्यूनतम 20 साल की सजा, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है, का प्रावधान है।

    आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने इस मामले में विशेष न्यायाधीश का दरवाजा खटखटाया था, यह आरोप लगाते हुए कि स्थानीय पुलिस ने पहले दी गई शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की।

    शिकायत में कहा गया है कि दो नाबालिग—एक लगभग 14 वर्ष की और दूसरी 17 वर्ष 6 महीने की—को माघ मेला 2025-26 के दौरान आरोपियों द्वारा यौन शोषण का शिकार बनाया गया।

    यह भी आरोप है कि यह कृत्य धार्मिक सेवा और शिष्यत्व के नाम पर किए गए।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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