NDPS मामले में मथुरा SSP ने आरोपियों के खिलाफ CCTV में दिखाई 'फर्जी बारदमगी', हाईकोर्ट ने कहा- 'गंभीर मामला', किया तलब
Shahadat
18 Aug 2026 8:45 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के SSP को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह आदेश NDPS मामले के दो आरोपियों द्वारा पेश किए गए CCTV फुटेज के आधार पर दिया गया, जिससे कोर्ट को प्रथम दृष्टया लगा कि उनके खिलाफ "फर्जी बरामदगी" दिखाई गई।
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने इस मामले को "बहुत गंभीर" बताया और SSP को निर्देश दिया कि वे आवेदकों द्वारा लगाए गए आरोपों का बिंदुवार (para-wise) जवाब दें।
यह आदेश आरोपी पिंकू और नरेश शर्मा द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। उन्हें NDPS Act की धारा 21, 22 और 25 के तहत गिरफ्तारी की आशंका थी।
सुनवाई के दौरान, आवेदकों के वकील ने एक पेन ड्राइव में CCTV फुटेज और अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया। यह बताया गया कि CCTV फुटेज में पुलिस को आवेदकों के घर से काले रंग का बैग ले जाते हुए दिखाया गया।
इसके बाद आरोप लगाया गया कि उसी बैग को बाद में एक स्कॉर्पियो गाड़ी से बरामद दिखाया गया, जिससे कथित तौर पर 358 ग्राम अल्प्राजोलम और ₹1,95,000 बरामद हुए।
आवेदकों के वकील ने आगे आरोप लगाया कि पुलिस ने आवेदकों के घर में रखे पैसे ले लिए, उसका गबन किया और बाद में उसका कुछ हिस्सा उन्हें झूठे मामले में फंसाने के लिए इस्तेमाल किया।
यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस ने ऐसा आवेदकों का आपराधिक इतिहास बढ़ाने के लिए किया।
आदेश में दर्ज है कि आवेदक पिंकू का पिछला आपराधिक इतिहास 8 मामलों का है, जबकि आवेदक नरेश शर्मा का आपराधिक इतिहास 3 मामलों का है।
दूसरी ओर, राज्य ने अग्रिम जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी जावेद से "भारी बरामदगी" हुई और आवेदक तथा एक अन्य आरोपी भागने में सफल रहे थे।
राज्य ने यह भी तर्क दिया कि कस्टोडियल पूछताछ (हिरासत में पूछताछ) के लिए आवेदकों की आवश्यकता हो सकती है।
हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने और आवेदन के साथ दाखिल CCTV फुटेज को देखने के बाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की:
"ऐसा लगता है कि ऑनलाइन समाचार पत्रों ने भी इस घटना की रिपोर्ट की है। प्रथम दृष्टया, कोर्ट की राय में आवेदकों के खिलाफ फर्जी बरामदगी दिखाई गई।"
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि यह एक बहुत "गंभीर मामला" है, इसलिए आदेश दिया कि मथुरा के पुलिस अधीक्षक (SSP) व्यक्तिगत रूप से पेश हों और अपना हलफनामा (Affidavit) दाखिल करें।
SSP को निर्देश दिया गया कि वे आवेदकों के हलफनामे और CCTV फुटेज के साथ दाखिल सप्लीमेंट्री हलफनामे में कही गई बातों का बिंदुवार (para-wise) जवाब दें।
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर, 2026 की तारीख तय की।
तब तक, कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर आवेदकों की गिरफ्तारी होती है तो उन्हें पर्सनल बॉन्ड और ज़मानत (Sureties) जमा करने की शर्त पर अंतरिम अग्रिम ज़मानत (Interim Anticipatory Bail) पर रिहा कर दिया जाए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष (Prosecution) अंतरिम अग्रिम ज़मानत रद्द करने की मांग कर सकता है।
आवेदक की ओर से वकील ईशान मेहता पेश हुए।
Case title - Pinku vs State of UP and connected matter


