इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती के SP से मांगा जवाब, कानून की समझ पर उठाए सवाल

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती के SP से मांगा जवाब, कानून की समझ पर उठाए सवाल

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को बस्ती के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. यशवीर सिंह के हलफनामे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा। एसपी ने अपने हलफनामे में कहा था कि कुछ अग्रिम जमानत (anticipatory bail) याचिकाएं मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित हैं, जिस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की।

    जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा,

    “यदि किसी जिले के एसपी को यह नहीं पता कि मजिस्ट्रेट के पास अग्रिम जमानत पर सुनवाई का अधिकार नहीं है, तो उनके कानून के बुनियादी ज्ञान पर सवाल उठता है।”

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BNSS की धारा 482 के अनुसार अग्रिम जमानत देने का अधिकार केवल हाईकोर्ट या सत्र न्यायालय को है, न कि मजिस्ट्रेट को।

    हाईकोर्ट ने एसपी से यह भी पूछा कि उन्होंने अपने हलफनामे में राज्य के उपमुख्यमंत्री का नाम क्यों लिया, जबकि ऐसा करना आवश्यक नहीं था। कोर्ट ने उन्हें 29 अप्रैल तक इन दोनों मुद्दों पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

    यह मामला रत्नेश कुमार उर्फ राजू शुक्ला द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका से जुड़ा है। 11 दिसंबर 2025 को कोर्ट को बताया गया था कि जांच अधिकारी (IO) को उस समय निलंबित कर दिया गया जब उन्होंने आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती वारंट (NBW) की मांग की थी।

    इससे पहले कोर्ट ने एसपी को निर्देश दिया था कि वे बताएं कि किन परिस्थितियों में उन्होंने IO को निलंबित किया और वर्तमान में जांच कौन कर रहा है। साथ ही, कोर्ट ने इस कार्रवाई को लेकर आपराधिक अवमानना की चेतावनी भी दी थी।

    16 अप्रैल को जब एसपी का हलफनामा कोर्ट के सामने आया, तो कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि उन्होंने कहा कि आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित हैं। कोर्ट ने यह भी पाया कि एसपी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि उन्होंने मजिस्ट्रेट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट पर आपत्ति क्यों जताई।

    खंडपीठ ने कहा कि जब मजिस्ट्रेट ने न्यायिक विचार के बाद वारंट जारी किया, तो एसपी को अपनी आपत्ति का कारण बताना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया।

    अंततः, हाईकोर्ट ने एसपी बस्ती को निर्देश दिया कि वे 29 अप्रैल तक नया व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सभी मुद्दों पर स्पष्ट जवाब दें।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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