स्निफर डॉग की ट्रैकिंग तभी साक्ष्य मानी जाएगी जब पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही उसका समर्थन करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

2 July 2026 4:37 PM IST

  • स्निफर डॉग की ट्रैकिंग तभी साक्ष्य मानी जाएगी जब पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही उसका समर्थन करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि स्निफर डॉग (खोजी कुत्ते) की ट्रैकिंग को तब तक विश्वसनीय साक्ष्य नहीं माना जा सकता, जब तक उसके ट्रैकिंग की पूरी प्रक्रिया का विवरण पंचनामा में दर्ज न हो और डॉग हैंडलर अदालत में गवाही देकर उसका समर्थन न करे। कोर्ट ने कहा कि पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही में कोई विरोधाभास नहीं होना चाहिए।

    जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी 1998 के एक हत्या मामले में चार दोषियों की आजीवन कारावास की सजा रद्द करते हुए की।

    मामले में अभियोजन का दावा था कि मृतक के कपड़ों को सूंघने के बाद स्निफर डॉग सीधे आरोपियों के घर तक पहुंचा था। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर न तो डॉग ट्रैकिंग का कोई पंचनामा या रिपोर्ट मौजूद थी और न ही डॉग हैंडलर को गवाह के रूप में पेश किया गया था। ऐसे में स्निफर डॉग की ट्रैकिंग पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन के प्रमुख गवाहों ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने न तो हत्या देखी थी और न ही कथित अवैध संबंधों को। उनके बयान केवल गांव में फैली अफवाहों और सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थे।

    सुप्रीम कोर्ट के Sujit Biswas v. State of Assam फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने दोहराया कि सिर्फ संदेह, चाहे वह कितना भी गंभीर क्यों न हो, सबूत का स्थान नहीं ले सकता।

    इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों के बजाय संदेह और अनुमान के आधार पर दोषसिद्धि की थी। इसलिए अदालत ने चारों आरोपियों की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा रद्द करते हुए दोनों आपराधिक अपीलें स्वीकार कर लीं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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