3 महीने में कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने हाथरस पीड़िता के परिवार को दूसरी जगह बसाने में 'बेवजह रुकावट' डालने पर यूपी सरकार को फटकार लगाई

Shahadat

26 Aug 2026 10:06 AM IST

  • 3 महीने में कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने हाथरस पीड़िता के परिवार को दूसरी जगह बसाने में बेवजह रुकावट डालने पर यूपी सरकार को फटकार लगाई

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह हाथरस गैंगरेप और हत्या की पीड़िता के परिवार को 3 महीने के भीतर गाजियाबाद या नोएडा में बसाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करे। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार उसके पहले के निर्देशों का पालन करने में "बेवजह रुकावट" डाल रही थी।

    जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की बेंच ने कहा कि 22 फरवरी 2025 को राज्य सरकार का जो फैसला आया था, जिसमें परिवार को कासगंज, एटा या अलीगढ़ में बसाने की पेशकश की गई, उसमें गाजियाबाद या नोएडा में बसाने की उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया। इसलिए "कानून की नज़र में यह कोई फैसला नहीं था"।

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करें और चेतावनी दी कि अगर निर्देश का पालन नहीं किया गया तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।

    ये निर्देश हाईकोर्ट द्वारा 2020 में हाथरस रेप और अंतिम संस्कार की घटना के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार से जुड़े मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर शुरू की गई कार्यवाही के तहत दिए गए।

    कोर्ट ने गौर किया कि 26 सितंबर 2024, 14 नवंबर 2024 और 8 जनवरी 2025 के अपने पहले के आदेशों के बावजूद, राज्य सरकार ने गाजियाबाद या गौतम बुद्ध नगर में पुनर्वास के लिए परिवार की मांग पर ठीक से विचार नहीं किया।

    कोर्ट ने कहा:

    "ऐसा लगता है कि राज्य सरकार हमारे 26.09.2024, 14.11.2024 और 08.01.2025 के आदेशों के अनुसार विचार करने में बेवजह रुकावट डाल रही है।"

    बेंच ने यह भी कहा कि राज्य के वकील केवल 22 फरवरी 2025 के फैसले का ही हवाला दे पाए, जो कोर्ट के अनुसार "असल में कानून की नज़र में कोई फैसला नहीं है," क्योंकि इसमें गाजियाबाद या गौतम बुद्ध नगर में पुनर्वास के लिए परिवार की मांग का कोई ज़िक्र तक नहीं था। कोर्ट ने कहा कि राज्य के व्यवहार से परिवार के इस दावे को बल मिलता है कि राज्य इसे "विरोधी मुकदमे" (Adversarial Litigation) की तरह देख रहा है और पीड़ित परिवार को लाभ देने से "साफ़ इनकार" कर रहा है।

    गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 26 जुलाई, 2022 को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह परिवार के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास और बच्चों की शिक्षा की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए उन्हें हाथरस से बाहर उत्तर प्रदेश में ही किसी दूसरी जगह बसाने पर विचार करे।

    जुलाई 2022 का यह निर्देश तब जारी किया गया, जब हाथरस रेप पीड़िता के परिवार वालों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि वे नोएडा में बसना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें हाथरस में सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा था। पीड़िता के भाई ने भी नोएडा में सरकारी नौकरी करने की इच्छा जताई।

    इसके बाद राज्य ने कोर्ट को बताया कि परिवार अलीगढ़, एटा और कासगंज में से किसी एक जगह को चुन सकता है और चुनी हुई जगह पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी।

    हालांकि, परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही के सिलसिले में दिल्ली में पुनर्वास की मांग की थी।

    बाद में सुप्रीम कोर्ट में अपने अधिकारों पर कोई असर डाले बिना, उन्होंने हाई कोर्ट के सामने संकेत दिया कि वे गाजियाबाद या नोएडा में बसने के लिए तैयार हैं, जहाँ परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं।

    14 नवंबर, 2024 को हाईकोर्ट ने परिवार को हाथरस के ज़िला मजिस्ट्रेट के पास औपचारिक आवेदन जमा करने का निर्देश दिया। इसके बाद 2 दिसंबर, 2024 को आवेदन जमा किया गया, जिसमें गाजियाबाद/गौतम बुद्ध नगर में बसने/पुनर्वास की मांग की गई।

    हालांकि, राज्य के 22 फरवरी, 2025 के फ़ैसले में आखिर में बसने के लिए केवल कासगंज, एटा और अलीगढ़ की जगहों का ही प्रस्ताव दिया गया। हाईकोर्ट ने पाया कि इसमें गाजियाबाद/गौतम बुद्ध नगर के लिए परिवार के अनुरोध का कोई ज़िक्र तक नहीं था।

    राज्य के जवाब को अपर्याप्त पाते हुए कोर्ट ने सरकार को मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश देने से आगे बढ़कर यह निर्देश दिया:

    "इसलिए हम 22.02.2025 के फ़ैसले को रद्द करते हैं और राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वह पीड़ित परिवार को गाज़ियाबाद या नोएडा (जैसा भी मामला हो) में बसाए और उन्हें नई जगह पर रहने की सुविधा दे; यह काम हर हाल में तीन महीने के अंदर पूरा होना चाहिए।"

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एक बार परिवार को बसाने का काम पूरा हो जाने के बाद परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी भी दी जाए, जैसा कि 26 जुलाई, 2022 के आदेश में कहा गया।

    अनुपालन हलफ़नामा (Compliance Affidavit) अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) द्वारा दाखिल किया जाना है। कोर्ट ने कहा कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो अधिकारी को अगली तारीख पर कोर्ट में पेश होना होगा।

    बेंच ने कहा कि वह अंतिम संस्कार के मुद्दे पर मेरिट के आधार पर अंतिम सुनवाई करना चाहती थी, लेकिन पहले अपने पिछले निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना ज़रूरी समझा।

    कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के सामने उपलब्ध उपाय के बारे में अपनी पिछली टिप्पणी पर भी फिर से विचार किया। उसने स्पष्ट किया कि इससे हाई कोर्ट को दखल देने से नहीं रोका जा सकता, खासकर तब जब "हाईकोर्ट में जाने के लिए असाधारण परिस्थितियां मौजूद हों।"

    राज्य के 'अड़ियल रवैये' और पिछले आदेशों का पालन न करने में ऐसी असाधारण परिस्थितियां पाते हुए कोर्ट ने माना कि स्पेशल कोर्ट इस मुद्दे पर विचार करने के लिए शायद सही जगह नहीं है और हाई कोर्ट को इसमें दखल देना चाहिए।

    मामले की सुनवाई 30 नवंबर, 2026 के लिए तय की गई।

    यह कार्यवाही 2020 के हाथरस मामले से जुड़ी है, जिसमें अनुसूचित जाति समुदाय की 19 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार हुआ था। उसके बाद 29-30 सितंबर, 2020 की तड़के उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया; ये परिस्थितियां ऐसी थीं जो उसके परिवार की इच्छा के विरुद्ध लग रही थीं।

    हाईकोर्ट ने सम्मानजनक अंतिम संस्कार/दाह-संस्कार के अधिकार से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Ccognizance) लिया था। इसके बाद की कार्यवाही में परिवार के पुनर्वास, नई जगह पर बसाने, सुरक्षा और अन्य राहतों पर भी विचार किया गया।

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