रेप केस में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, आरोपों को बताया 'बनाई गई कहानी'

  • रेप केस में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, आरोपों को बताया बनाई गई कहानी

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को 2025 के रेप मामले में डिस्चार्ज कर दिया है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राठौर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज की गई थी। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से बताई गई कहानी इतनी “बेतुकी” है कि सामान्य विवेक वाला व्यक्ति उस पर विश्वास नहीं कर सकता।

    क्या था मामला?

    अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता की राठौर से वर्ष 2018 में मुलाकात हुई थी, जब वह विधायक थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राठौर ने उसे राजनीतिक संरक्षण और गठजोड़ का आश्वासन दिया तथा बाद में उसे एक सामाजिक संगठन में जिला अध्यक्ष के पद पर नियुक्त कराया।

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2020 में राठौर ने उसके साथ रेप किया। उसने आरोप लगाया कि इसके बाद राठौर ने शादी का आश्वासन देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।

    बाद में राठौर के सांसद बनने के बाद भी कथित तौर पर संबंध जारी रहे। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे धमकाया गया और उसके साथ जबरदस्ती की गई।

    जांच में क्या सामने आया?

    शिकायतकर्ता का 17 जनवरी 2025 को मेडिकल परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट में बल प्रयोग के कोई संकेत नहीं मिले, हालांकि रिपोर्ट ने यौन हिंसा की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया।

    जांच के दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता और राठौर के बीच 26 अगस्त 2024 की बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी बरामद की। रिकॉर्डिंग के ट्रांसक्रिप्ट में करीब पांच साल से चले आ रहे शारीरिक संबंध और शादी के वादे का उल्लेख था। FSL रिपोर्ट में आवाज को राठौर की आवाज बताया गया।

    राठौर ने ट्रायल कोर्ट के सामने दलील दी कि जांच में सामने आई सामग्री स्वयं दोनों के बीच लंबे समय से चल रहे सहमति वाले संबंध की ओर इशारा करती है।

    हाईकोर्ट ने क्या कहा?

    डिस्चार्ज के स्तर पर कोर्ट को यह देखना होता है कि जांच के दौरान एकत्र सामग्री को प्रथम दृष्टया स्वीकार करने पर कथित अपराध के आवश्यक तत्व बनते हैं या नहीं। हालांकि, इस चरण में कोर्ट को मिनी-ट्रायल नहीं करना होता।

    मामले की सामग्री देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे। कोर्ट ने FIR, जांच के दौरान दिए गए बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों पर भी गौर किया।

    कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री दो विवाहित और वयस्क व्यक्तियों के बीच लंबे समय तक चले सहमति वाले विवाहेतर संबंध की ओर संकेत करती है और यह शादी के लालच में रेप के आरोप के विपरीत है।

    कोर्ट ने शिकायतकर्ता की कहानी को “कुक्ड अप” बताते हुए कहा कि यह ऐसी कहानी है जिस पर सामान्य विवेक वाला व्यक्ति विश्वास नहीं कर सकता।

    राठौर को सभी आरोपों से डिस्चार्ज

    हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में एकत्र सामग्री से राठौर के खिलाफ कथित अपराधों को लेकर मजबूत संदेह पैदा नहीं होता। ऐसे में विरोधाभासी और निराधार आरोपों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

    कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बावजूद मामले में हस्तक्षेप करने के अपने अधिकार को भी बरकरार रखा।

    हाईकोर्ट ने राठौर की आपराधिक रिवीजन स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट का डिस्चार्ज आवेदन खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया और उन्हें BNS की धारा 64(2), 69, 351(3) और 127(2) के तहत लगाए गए आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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