बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की कथित घटनाओं के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट में खराब आने वाले स्कूल बस ड्राइवरों को लेकर चिंता जताई

  • बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की कथित घटनाओं के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट में खराब आने वाले स्कूल बस ड्राइवरों को लेकर चिंता जताई

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिन स्कूल वाहन ड्राइवरों की पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट खराब पाई गई, वे नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि बार के सदस्यों ने सुझाव दिया था कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जहां संभव हो, स्कूल वैन ड्राइवर महिलाएँ होनी चाहिए।

    जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच उत्तर प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान उन्हें बताया गया कि "मिशन भरोसा" के तहत पुलिस वेरिफिकेशन में 2,370 स्कूल वाहन ड्राइवरों में से 527 की रिपोर्ट खराब पाई गई।

    इसके बाद कोर्ट ने कहा,

    "ऐसा लगता है कि परिवहन विभाग ने डेटा इकट्ठा किया और पुलिस वेरिफिकेशन से पता चला है कि कुल 2,370 स्कूल वाहन ड्राइवरों में से 527 की रिपोर्ट 'मिशन भरोसा' के तहत खराब पाई गई। यह एक गंभीर मुद्दा है जो सीधे तौर पर नाबालिग बच्चों की सुरक्षा को प्रभावित करता है। बार के कई सदस्यों ने कहा कि स्कूल के बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बात पर विचार किया जा सकता है कि स्कूल वैन ड्राइवर, यदि संभव हो तो, महिलाएँ हों।"

    एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि वह महिला स्कूल वैन ड्राइवरों के सुझाव पर विचार करेंगे और इस बारे में निर्देश लेंगे।

    यह भी बताया गया कि स्कूल बसों और वैन के ड्राइवरों द्वारा नाबालिग बच्चों के यौन उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। यू.पी. मोटर व्हीकल रूल्स की धारा 222(b) का हवाला देते हुए कहा गया कि प्राइवेट बसों को दिए जाने वाले लाइसेंस और स्कूलों व प्राइवेट ट्रांसपोर्ट एजेंसियों के बीच होने वाले समझौतों में इस मुद्दे से निपटने वाली शर्तें शामिल होनी चाहिए। स्कूल वैन के लिए भी ऐसे ही प्रावधानों की मांग की गई, जिसमें स्कूल मैनेजमेंट के लिए बच्चों को लाने-ले जाने वाले ड्राइवरों की जानकारी और बैकग्राउंड की जाँच करना ज़रूरी हो।

    एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि इस मामले को संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाया जाएगा और उनका जवाब कोर्ट के सामने रखा जाएगा।

    कोर्ट ने स्कूलों से जुड़ी सुरक्षा की अन्य चिंताओं पर भी विचार किया।

    एमिक्स क्यूरी ने कहा कि गैर-संरचनात्मक खतरों पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने राज्य के लगभग 4,000 स्कूलों का ज़िक्र किया जिनके ऊपर से हाई-टेंशन बिजली की लाइनें गुज़रती हैं। उन घटनाओं का भी ज़िक्र किया जिनमें ऐसी लाइनें स्कूलों पर गिर गईं। उन्होंने 25 जुलाई 2026 को "हिंदुस्तान टाइम्स" में छपी एक स्टडी का हवाला दिया।

    यह देखते हुए कि "एक ज़रूरी मुद्दा हमारे ध्यान में लाया गया है, जिस पर गौर करने की भी ज़रूरत है", कोर्ट ने निर्देश दिया कि यू.पी. पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को उसके मैनेजिंग डायरेक्टर के ज़रिए प्रतिवादी (Respondent) बनाया जाए। साथ ही कोर्ट ने एडिशनल एडवोकेट जनरल से कहा कि वे इस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारी को दें और सुनवाई की अगली तारीख तक उनकी राय हासिल करें।

    कोर्ट ने जौनपुर ज़िले के मुंगराबादशाहपुर ब्लॉक के समरी प्राइमरी स्कूल की इमारत के गिरने (जिस दिन स्कूल बंद था) और लखनऊ में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा चलाए जा रहे एक स्कूल में लोहे का गेट गिरने से उसके नीचे दबकर आठ साल के बच्चे की मौत की अख़बारों में छपी खबरों का ज़िक्र करते हुए कहा:

    "ऊपर बताई गई बातों का ज़िक्र सिर्फ़ यह दिखाने के लिए है कि यह काम बहुत ज़रूरी और तुरंत ध्यान देने वाला है। इसलिए हम राज्य और संबंधित एजेंसियों से उम्मीद करते हैं कि वे ऐसा काम करें जिससे हमारे बच्चों के लिए शिक्षण संस्थानों को सुरक्षित जगह बनाने की पूरी कोशिश की जा सके।"

    लखनऊ के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ट्रैफ़िक) द्वारा दाखिल एक शुरुआती रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया गया। इस रिपोर्ट में मार्शल की तैनाती के आधार पर सात स्कूलों को 'अच्छा', पाँच को 'औसत' और पाँच को 'खराब' रेटिंग दी गई। एमिक्स क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि शिक्षण संस्थानों की मदद से तैयार की जा रही SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) अब अंतिम चरण में है।

    यह भी बताया गया कि शिक्षण संस्थानों के आस-पास ट्रैफ़िक को कंट्रोल रूम से रियल-टाइम में मैनेज करने के लिए स्कूलों के एंट्री गेट पर CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। ज़रूरी कैमरों की संख्या और उनकी अनुमानित लागत की जानकारी अगली सुनवाई पर कोर्ट के सामने रखी जाएगी।

    कोर्ट ने अपने पहले के उस निर्देश में बदलाव किया, जिसमें राज्य को स्कूलों का निरीक्षण करने वाले कर्मचारियों की जानकारी की पुष्टि (वेरिफिकेशन) करने के लिए कहा गया; कोर्ट ने कहा कि स्कूलों का निरीक्षण इस पुष्टि पर निर्भर नहीं होगा। सफल बोली लगाने वाली कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह अपने निरीक्षण करने वाले कर्मचारियों का डेटा तुरंत राज्य सरकार को सौंपे और राज्य सरकार बाद में अपनी तरफ से पुष्टि की प्रक्रिया पूरी करे।

    एडिशनल एडवोकेट जनरल ने बताया कि सफल बोली लगाने वाली कंपनी को लगभग 2000 कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया और वे निरीक्षण के काम के लिए ओरिएंटेशन और ट्रेनिंग ले रहे थे। निरीक्षण करने वाले कर्मचारियों का पूरा डेटा और जानकारी एजेंसी के पास ही थी, जिसे राज्य सरकार को भेजा जाना था, लेकिन अगर पुष्टि का काम भी राज्य सरकार को सौंपा जाता तो निरीक्षण में और देरी होती। कोर्ट ने इस दलील को मान लिया।

    इस मामले की अगली सुनवाई 18.08.2026 को होगी।

    Case Title: Gomti River Bank Residents Thru. Secy. Mr. Girdhar Gopal v. State Of U.P. Through Prin. Secy. Housing And Urban Dev. And Ors.

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