इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिजिकल और ई-फाइलिंग के लिए एक समान फॉर्मेटिंग नियम तय किए; नए नियम 12 नवंबर से लागू होंगे

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिजिकल और ई-फाइलिंग के लिए एक समान फॉर्मेटिंग नियम तय किए; नए नियम 12 नवंबर से लागू होंगे

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए, जिनमें अदालत में दायर किए जाने वाले दस्तावेजों (प्लीडिंग्स) के लिए एक समान फॉर्मेटिंग नियम तय किए गए।

    अदालत ने अनिवार्य किया कि अंग्रेजी में तैयार दस्तावेजों को 'टाइम्स न्यू रोमन' (Times New Roman) फॉन्ट में, 14 के फॉन्ट साइज और डबल लाइन स्पेसिंग के साथ टाइप किया जाना चाहिए। हिंदी दस्तावेजों के लिए 'यूनिकोड' (Unicode) फॉन्ट, 14 के फॉन्ट साइज और इसी तरह की लाइन स्पेसिंग का उपयोग करना होगा।

    ये निर्देश 12 नवंबर, 2026 से लागू होंगे और हाईकोर्ट में दायर की जाने वाली सभी याचिकाओं, शपथ पत्रों (Affidavits), जवाबी शपथ पत्रों (Counter-Affidavits), आवेदनों और अन्य दस्तावेजों पर लागू होंगे।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि ये नियम फिजिकल फाइलिंग (कागजी दस्तावेजों) पर भी समान रूप से लागू होंगे।

    जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने हाउस-टैक्स असेसमेंट (गृह-कर निर्धारण) विवाद से जुड़ी रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

    याचिका की जांच करते समय अदालत ने पाया कि दस्तावेजों की फॉर्मेटिंग में एकरूपता (Uniformity) का अभाव है। खंडपीठ ने गौर किया कि मौजूदा प्रावधानों और ई-फाइलिंग निर्देशों में ऐसा कोई एक समान फॉर्मेट नहीं था जो फिजिकल और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों तरह की फाइलिंग पर लागू हो सके।

    अदालत ने कहा,

    "एकरूपता न होने से दस्तावेजों को पढ़ने में कठिनाई होती है और रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से पेश करने में बाधा आती है। इसलिए अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले दस्तावेजों में एकरूपता लाने के लिए इस संबंध में निर्देश जारी करना आवश्यक हो गया।"

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों में 'बोल्ड' (Bold) और 'इटैलिक' (Italic) फॉन्ट का उपयोग किस तरह किया जा सकता है। निर्देश दिया गया कि 'बोल्ड' फॉन्ट का उपयोग केवल दस्तावेजों और इंडेक्स में संलग्नकों (Annexures) को चिह्नित करने या उनका विवरण देने के लिए ही किया जाएगा। दस्तावेज के किसी अन्य हिस्से को बोल्ड नहीं किया जाएगा।

    इसी तरह, निर्देश दिया गया कि 'इटैलिक' फॉन्ट का उपयोग केवल दस्तावेजों में उद्धृत अंशों (Extracts) और अदालतों या कानूनी प्रावधानों के संदर्भ देने के लिए ही किया जा सकता है। 'प्रेयर' (राहत की मांग) या 'रिलीफ क्लॉज' (राहत संबंधी खंड) को इटैलिक नहीं किया जाएगा। इसके अलावा कहीं और इटैलिक फॉन्ट का उपयोग नहीं किया जाएगा।

    अदालत ने आगे स्पष्ट किया कि लागू नियमों और ई-फाइलिंग निर्देशों के तहत निर्धारित मार्जिन (हाशिए) के नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। अदालत ने दलीलों (Pleadings) को पेश करने से जुड़े नियमों की जांच करते समय इलाहाबाद हाईकोर्ट के नियमों और ई-फाइलिंग निर्देशों के संबंधित प्रावधानों का भी हवाला दिया।

    अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे इस आदेश को इलाहाबाद स्थित मुख्य पीठ (Principal Seat) और लखनऊ पीठ के सभी फाइलिंग और जांच (Scrutiny) विभागों तक पहुंचाएं, और इन निर्देशों की जानकारी बार (वकीलों) को भी दें।

    स्टाम्प रिपोर्टिंग विभागों को निर्देश दिया गया कि वे 12 नवंबर, 2026 से निर्धारित नियमों के अनुसार दलीलों की जांच करें।

    Case Title : Sheo Kinkar Singh vs. State of U.P. and 2 others 2026 LiveLaw (AB) 900

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