'अवध बार को लोकतांत्रिक व्यवहार में मिसाल कायम करनी चाहिए': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बार चुनाव की अपील की
Shahadat
14 Oct 2026 9:21 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि अवध बार एसोसिएशन के आगामी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से हों। कोर्ट ने कहा कि बार को समाज के लिए लोकतांत्रिक व्यवहार की मिसाल कायम करनी चाहिए।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि चुनावों में ईमानदारी, निष्पक्षता, पारदर्शिता और आपसी सम्मान के उच्चतम मानक दिखने चाहिए।
बेंच ने कहा,
"कानूनी बिरादरी से उम्मीद की जाती है कि वे समाज के लिए मार्गदर्शक बनें और दूसरों के लिए मिसाल कायम करें। अगर वकील, जिन पर संविधान और कानून को बनाए रखने की जिम्मेदारी है, अपने चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और गरिमापूर्ण तरीके से कराते हैं तो इससे समाज में एक सशक्त संदेश जाता है कि मतभेदों को कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से सुलझाया जा सकता है।"
ये टिप्पणियां हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अवध बार एसोसिएशन के चुनावों के संचालन से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान (Suo Motu) वाली जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते समय की गईं।
अपने आदेश में कोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों को दोहराया, जिसमें उम्मीदवारों को चुनाव के सिलसिले में हाईकोर्ट परिसर के अंदर या बाहर पोस्टर, स्टिकर और बैनर लगाने से मना किया गया।
कोर्ट ने उम्मीदवारों को हाईकोर्ट परिसर के अंदर जुलूस निकालने या वहां खाने-पीने की चीजें बांटने से भी मना किया।
इसके अलावा, कोर्ट ने उम्मीदवारों को हाईकोर्ट परिसर के अंदर और परिसर के बाहर 100 मीटर के दायरे में बार के सदस्यों को हैंडबिल और पर्चे बांटने से भी रोका था।
बेंच ने चेतावनी दी थी कि नियमों का उल्लंघन करने पर उम्मीदवारों को चुनाव में भाग लेने से रोका जा सकता है। उसने यह भी कहा था कि ऐसे उल्लंघन के मामले में उचित कार्रवाई के लिए बार काउंसिल को मामला भेजा जा सकता है या कोर्ट द्वारा अवमानना की कार्यवाही सहित अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
8 अक्टूबर को मामले की दोबारा सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीनियर रजिस्ट्रार को कोई भी गलत गतिविधि दिखाई देने पर उसे तुरंत सीनियर जज और एल्डर्स कमेटी के ध्यान में लाया जाए, जो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकें। इससे पहले, हाईकोर्ट ने चुनावों को लेकर चिंता जताई, खासकर चुनाव पोस्टरों और प्रचार सामग्री से कोर्ट परिसर के खराब होने को लेकर।
हाईकोर्ट के 18 सितंबर के आदेश के बाद सीनियर रजिस्ट्रार ने 28 सितंबर को परिसर का निरीक्षण किया और रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में उन उम्मीदवारों की पहचान की गई, जिनके पोस्टर, स्टिकर और बैनर कोर्ट परिसर के अंदर और बाहर दीवारों पर चिपके पाए गए।
8 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान, एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन और सीनियर एडवोकेट मोहम्मद आरिफ खान ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के निर्देशों का काफी हद तक पालन किया गया और ज़्यादातर पोस्टर, बैनर और स्टिकर हटा दिए गए।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए बेंच ने उस समय रिपोर्ट में पहचाने गए उम्मीदवारों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करना उचित नहीं समझा, लेकिन भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा।
बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की मुख्य ज़िम्मेदारी एल्डर्स कमेटी की है और उस समय किसी और आदेश की ज़रूरत नहीं थी।
कोर्ट ने कहा,
"...कानूनी बिरादरी के सदस्यों के बीच चुनाव सिर्फ़ पदाधिकारी चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। असल में, यह लोकतंत्र का एक उत्सव है, जिसे मनाया जाना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उन सिद्धांतों को बनाए रखने का मौका देता है जिन पर कानूनी पेशा और हमारा लोकतांत्रिक समाज टिका है। जैसा कि इस कोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में कहा गया, वकील भी कोर्ट के अधिकारी होते हैं और उन पर कानून के शासन की रक्षा करने, अधिकारों की सुरक्षा करने और न्याय को बढ़ावा देने की ज़िम्मेदारी होती है।"
कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट प्रशांत चंद्रा की इस बात को भी रिकॉर्ड पर लिया कि एल्डर्स कमेटी ने अवध बार एसोसिएशन के सदस्यों से "एक बार एक वोट" (one bar one vote) के सिद्धांत पर घोषणा करने को कहा था।
लोकतांत्रिक तरीके से काम करने के महत्व पर ज़ोर देते हुए बेंच ने कहा कि हर वोटर बिना किसी डर, पक्षपात, दबाव या लालच के अपनी पसंद का इस्तेमाल करने में सक्षम होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि एल्डर्स कमेटी को अपनी ज़िम्मेदारियाँ निष्पक्ष रूप से निभानी चाहिए और उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया और उसके नतीजों का सम्मान करना चाहिए। साथ ही गलत तरीकों से बचना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि असली शिकायतों को तय प्रक्रिया के ज़रिए उठाया जाना चाहिए और लागू नियमों के अनुसार उनका समाधान किया जाना चाहिए। इसके लिए पहले मध्यस्थता और 'एल्डर्स कमेटी' (बुज़ुर्गों की समिति) से संपर्क करना चाहिए।
कोर्ट ने कहा,
"आगामी चुनाव के मामले में अदालत का दरवाज़ा खटखटाना आखिरी विकल्प होना चाहिए।"
हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया।
Case Title : In Re- Conduct Of Elections To The Oudh Bar Association 2026 LiveLaw (AB) 835

