अपील/रिवीजन में संशोधन पर Order VI Rule 17 का प्रावधान सख्ती से लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Praveen Mishra
2 April 2026 3:36 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश VI नियम 17 का वह प्रावधान, जो ट्रायल शुरू होने के बाद संशोधन पर रोक लगाता है, अपील और पुनरीक्षण (revision) कार्यवाही में सख्ती से लागू नहीं होता।
जस्टिस योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि यह प्रावधान मूल रूप से सिविल मुकदमों (trial) में pleadings के संशोधन को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है, ताकि साक्ष्य शुरू होने के बाद देरी से बदलाव कर प्रक्रिया को प्रभावित न किया जा सके। इसलिए इसे अपील या पुनरीक्षण कार्यवाही में यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।
मामला उस याचिका से संबंधित था, जिसमें प्रांतीय लघु वाद न्यायालय अधिनियम की धारा 25 के तहत दायर पुनरीक्षण याचिका में संशोधन की मांग को निचली अदालत द्वारा खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने संशोधन को देर से दायर बताते हुए और उचित सावधानी (due diligence) की कमी का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षण कार्यवाही ट्रायल जैसी नहीं होती, क्योंकि इसमें साक्ष्य रिकॉर्ड नहीं किए जाते बल्कि निचली अदालत के रिकॉर्ड की समीक्षा की जाती है। ऐसे में “ट्रायल शुरू होने” की शर्त का वहां सीधा उपयोग नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि अपील और पुनरीक्षण में ऐसे कानूनी प्रश्न, जो मामले की जड़ से जुड़े हों, किसी भी स्तर पर उठाए जा सकते हैं। हालांकि, नए तथ्यों को जोड़ने या पूरे तथ्यात्मक ढांचे को बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती, विशेष रूप से पुनरीक्षण कार्यवाही में।
इस मामले में कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगा गया संशोधन केवल कानूनी प्रश्न तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें तथ्यात्मक पहलू भी शामिल थे, जिससे पूरे मामले को फिर से खोलने की आवश्यकता पड़ती। साथ ही, याचिकाकर्ता का पूर्व आचरण भी यह दर्शाता था कि वह पहले भी इसी तरह के प्रयास कर चुका है।
इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि संशोधन का आवेदन bona fide नहीं है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए संशोधन आवेदन अस्वीकार करने के आदेश को बरकरार रखा।

