ग्रांट-इन-एड संस्थानों में कार्यरत कार्यवाहक प्रिंसिपल को मिलेगा समान वेतन, लेकिन पद पर बने रहने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Praveen Mishra
6 April 2026 11:47 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि ग्रांट-इन-एड (अनुदानित) संस्थानों में कार्यरत कार्यवाहक (ऑफिसिएटिंग) प्रिंसिपल को नियमित प्रिंसिपल के बराबर वेतन दिया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबे समय तक इस पद पर कार्य करने से उन्हें केवल वेतन का अधिकार मिलेगा, पद पर बने रहने का नहीं।
जस्टिस सुमित्रा दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि जब कोई शिक्षक प्रिंसिपल के रूप में कार्य करता है और अधिक जिम्मेदारियां निभाता है, तो उसे उसी के अनुरूप वेतन मिलना उसका अधिकार है।
अदालत ने यह भी कहा कि U.P. Education Service Selection Commission Act, 2023, U.P. Intermediate Education Act, 1921 पर प्रभावी होगा, खासकर उस स्थिति में जब नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति हो जाती है। ऐसे में कार्यवाहक प्रिंसिपल को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं होगा।
यह मामला उन याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था जो विभिन्न कॉलेजों में कार्यवाहक प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत थे और नियमित प्रिंसिपल के बराबर वेतन की मांग कर रहे थे। एकल पीठ द्वारा याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने विशेष अपील दायर की थी।
अदालत ने अपने पुराने फैसलों—Dhaneshwar Singh Chauhan Vs District Inspector of Schools और Narbdeshwar Misra Vs DIOS, Deoria—का हवाला देते हुए कहा कि कार्यवाहक प्रिंसिपल को नियमित प्रिंसिपल के समान वेतन मिलना चाहिए, विशेषकर जब पद 30 दिनों से अधिक समय तक खाली रहता है।
कोर्ट ने यह भी माना कि किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन बिना प्रिंसिपल के संभव नहीं है, इसलिए कार्यवाहक प्रिंसिपल की नियुक्ति आवश्यक है। हालांकि, Commission Act, 2023 में एड-हॉक प्रिंसिपल की नियुक्ति का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, फिर भी यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जा सकती।
अदालत ने कहा कि यदि प्रबंधन समिति (Committee of Management) रिक्तियों की सूचना नहीं देती, तो जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह इसे सुनिश्चित करे। केवल इस आधार पर कार्यवाहक प्रिंसिपल को वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता।
अंततः, कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति तक कार्यवाहक प्रिंसिपल के रूप में कार्य करते रहेंगे और उन्हें नियमित प्रिंसिपल के बराबर वेतन दिया जाएगा।

