'हलाला' की आड़ में अपराध को व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में FIR रद्द करने से किया इनकार

  • हलाला की आड़ में अपराध को व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगरेप मामले में FIR रद्द करने से किया इनकार

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के कथित निकाह हलाला के दौरान नाबालिग से दुष्कर्म और 2025 में कथित 'डबल हलाला' के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि विवाह या व्यक्तिगत कानून की आड़ में कोई अपराध किया जाता है, तो उसे व्यक्तिगत कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता।

    जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि आपराधिक कानून में व्यक्तिगत कानूनों की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक कि स्वयं कानून ऐसा अपवाद न प्रदान करे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी नाबालिग लड़की को हलाला के नाम पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है, तो ऐसा कृत्य POCSO Act के दायरे में आएगा।

    एफआईआर के अनुसार, पीड़िता की 2015 में 15 वर्ष की उम्र में मुख्य आरोपी से शादी कराई गई। 2016 में ट्रिपल तलाक के बाद कथित तौर पर हलाला के नाम पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। बाद में 2025 में दोबारा विवाह के लिए कथित 'डबल हलाला' के बहाने आरोपी के भाइयों और अन्य लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

    आरोपियों ने दलील दी कि ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला उस समय मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मान्य थे और एफआईआर संपत्ति व बाल अभिरक्षा विवाद में दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक नाबालिग के यौन शोषण और बाद में गैंगरेप का गंभीर मामला है, जिसकी विस्तृत पुलिस जांच आवश्यक है।

    इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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