'प्रथम दृष्टया कोई औचित्य नहीं': इलाहाबाद फाइलिंग्स पर NCLT प्रधान पीठ के 'संयुक्त स्क्रूटिनी' आदेश पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

Praveen Mishra

27 April 2026 4:20 PM IST

  • प्रथम दृष्टया कोई औचित्य नहीं: इलाहाबाद फाइलिंग्स पर NCLT प्रधान पीठ के संयुक्त स्क्रूटिनी आदेश पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

    इलाहाबाद हाईकोर्ट) ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से जुड़े एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि एनसीएलटी, इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच (स्क्रूटिनी) के लिए कोई लंबित कमी (डिफेक्ट) नहीं थी, इसलिए दिल्ली स्थित प्रधान पीठ द्वारा “संयुक्त स्क्रूटिनी” का आदेश पारित करने का कोई औचित्य नहीं था।

    जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल द्वारा प्रस्तुत निर्देशों का अवलोकन करते हुए कहा कि 23 फरवरी 2026 और 2 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार एनसीएलटी, इलाहाबाद में स्क्रूटिनी के लिए कोई भी याचिका लंबित नहीं थी।

    इसके बावजूद 27 फरवरी 2026 को एनसीएलटी, नई दिल्ली की प्रधान पीठ के रजिस्ट्रार द्वारा संयुक्त स्क्रूटिनी का आदेश पारित किया गया, जो प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता।

    दरअसल, एनसीएलटी, नई दिल्ली के रजिस्ट्रार ने 27 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी कर इलाहाबाद पीठ में दाखिल मामलों की जांच संयुक्त रूप से एनसीएलटी, प्रधान पीठ नई दिल्ली और एनसीएलटी, इलाहाबाद पीठ द्वारा किए जाने का निर्देश दिया था।

    इस आदेश से असंतुष्ट होकर तथा प्रधान पीठ की रजिस्ट्री द्वारा डिफेक्ट्स क्लियर न किए जाने के विरोध में कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का रुख किया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या एनसीएलटी, इलाहाबाद की रजिस्ट्री में स्क्रूटिनी के लिए पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध हैं। इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पर्याप्त स्टाफ मौजूद है और संयुक्त स्क्रूटिनी का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को सुगम बनाना था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया सुचारु होने के बाद स्क्रूटिनी का कार्य पुनः इलाहाबाद पीठ को सौंप दिया जाएगा।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आदेश पारित होने के समय एक नियमित उप-रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार कार्यरत थे और जयपुर पीठ, जो इलाहाबाद में ही कार्य कर रही थी, की स्क्रूटिनी भी वहीं की जा रही थी। ऐसे में संयुक्त स्क्रूटिनी का आदेश पारित करने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता।

    मामले में आगे की सुनवाई के लिए अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से और निर्देश प्राप्त करने को कहा है और अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की है।

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