दूसरी गर्भावस्था पर 2 साल का इंतजार जरूरी नहीं, मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

28 July 2026 7:44 PM IST

  • दूसरी गर्भावस्था पर 2 साल का इंतजार जरूरी नहीं, मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि पहली बार मिले मातृत्व अवकाश के बाद दो वर्ष पूरे नहीं हुए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) के प्रावधान उत्तर प्रदेश फाइनेंशियल हैंडबुक के नियमों पर प्रभावी होंगे।

    जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने दो स्टाफ नर्सों/नर्सिंग अधिकारियों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए कहा कि कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 में पहली और दूसरी गर्भावस्था के बीच किसी न्यूनतम समय अंतराल की शर्त नहीं है। ऐसे में फाइनेंशियल हैंडबुक के नियम या 8 दिसंबर 2008 का सरकारी आदेश इस वैधानिक अधिकार को सीमित नहीं कर सकते।

    मामले में दोनों याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2024 में 180 दिनों का मातृत्व अवकाश मिला था। वर्ष 2026 में दूसरी बार गर्भवती होने पर उन्होंने फिर 180 दिनों के अवकाश के लिए आवेदन किया, जिसे यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि पिछली मातृत्व छुट्टी के बाद दो वर्ष पूरे नहीं हुए हैं।

    हाईकोर्ट ने कहा कि मातृत्व लाभ देना, महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य और गरिमा की रक्षा करना संविधान के अनुच्छेद 38, 39, 42, 43 और 15 के तहत राज्य का संवैधानिक दायित्व है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फाइनेंशियल हैंडबुक के नियम अधिकतम कार्यपालिका के निर्देश हैं, जबकि कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 संसद द्वारा बनाया गया कानून है, इसलिए वही लागू होगा।

    इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं के अवकाश आवेदन खारिज करने के आदेश रद्द कर दिए और निर्देश दिया कि यदि वे कोड, 2020 के तहत नए सिरे से आवेदन करें तो कानून के अनुसार उन पर निर्णय लिया जाए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story