ISI एजेंट को पनाह देने और सेना की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने के आरोपी को जमानत से इनकार, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Praveen Mishra
10 July 2026 12:34 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के कथित एजेंट को पनाह देने और भारतीय सेना व वायुसेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने में मदद करने के आरोपी मोहम्मद अशफाक अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर रखा जाना चाहिए।
जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 437(6) के तहत 60 दिन में ट्रायल पूरा न होने पर जमानत देने का प्रावधान अनिवार्य (Mandatory) नहीं, बल्कि विवेकाधीन (Discretionary) है। यदि उचित कारण हों तो अदालत जमानत देने से इनकार कर सकती है।
मामले के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि उसने एक पाकिस्तानी नागरिक और कथित आईएसआई एजेंट को लगभग 20 महीने तक अपने घर में शरण दी। इस दौरान उसने उसे हिंदी, फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग सीखने में मदद की तथा भारतीय सेना और वायुसेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी ईमेल के जरिए पाकिस्तान और बांग्लादेश में मौजूद ISI नेटवर्क तक पहुंचाने में सहयोग किया। जांच के दौरान एजेंट के पास से कई अत्यंत गोपनीय सैन्य दस्तावेज भी बरामद हुए।
आरोपी ने दलील दी कि वह वर्ष 2015 से जेल में बंद है और अब तक 31 अभियोजन गवाहों में से एक का भी बयान दर्ज नहीं हुआ है। उसने त्वरित सुनवाई के अधिकार और धारा 437(6) CrPC का हवाला देते हुए जमानत की मांग की।
हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 437(6) का उद्देश्य लंबी अवधि तक विचाराधीन कैदियों को जेल में रखने से बचाना है, लेकिन यह जमानत का अपरिहार्य अधिकार (Indefeasible Right) नहीं देती। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
हालांकि, आरोपी की 10 वर्ष से अधिक की हिरासत को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की शीघ्र सुनवाई कर छह माह के भीतर ट्रायल पूरा किया जाए।


