अंतरिम जमानत पर आरोपी को अतिरिक्त धाराएं जुड़ने पर सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Praveen Mishra
24 Aug 2026 9:19 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतरिम जमानत पर चल रहे आरोपी को जांच के दौरान अतिरिक्त धाराएं जुड़ने के आधार पर पुलिस सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती। पुलिस को पहले संबंधित अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश कर उचित आदेश प्राप्त करना होगा।
जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने अंतरिम जमानत के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी को मनमाना करार देते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के आचरण की जांच के भी निर्देश दिए।
मामला आजमगढ़ के दुर्गेश यादव से जुड़ा है। उसके खिलाफ 27 मार्च 2026 को एक चाय की दुकान पर शिकायतकर्ता की पत्नी के साथ कथित गाली-गलौज और मारपीट के आरोप में FIR दर्ज हुई थी। उसे 9 अप्रैल को अंतरिम जमानत मिली थी, जिसे बाद की तारीखों में बढ़ाया जाता रहा।
जांच के दौरान BNS की धाराएं 109 और 117(2) जोड़ी गईं और SC/ST Act की एक धारा में बदलाव किया गया। इसके बावजूद, जब अंतरिम जमानत प्रभावी थी, पुलिस ने 6 मई को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
राज्य सरकार ने दलील दी कि अंतरिम जमानत पहले की धाराओं के आधार पर मिली थी और बाद में नई धाराएं जोड़े जाने के कारण आरोपी की गिरफ्तारी की जा सकती थी।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Pradeep Ram v. State of Jharkhand, Manoj Suresh Jhadav v. State of Maharashtra और Bhadresh Bipinbhai Sheth v. State of Gujarat के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कानून स्पष्ट है कि जमानत पर चल रहे आरोपी के खिलाफ बाद में नई धाराएं जुड़ने मात्र से उसे उसी मामले में सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को पहले उस अदालत को स्थिति से अवगत कराना चाहिए था, जिसने अंतरिम जमानत दी थी, और उसके आदेश की प्रतीक्षा करनी चाहिए थी।
पीठ ने कहा कि पुलिस द्वारा स्वयं गिरफ्तारी करना “मनमाना” था। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश का 29 मई 2026 का आदेश रद्द करते हुए दुर्गेश यादव को शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही कोर्ट ने SSP, आजमगढ़ को संबंधित पुलिस अधिकारियों के आचरण की जांच कराने का निर्देश दिया। जांच अपर पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी और SSP को तीन सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को होगी।


