स्टांप शुल्क की कमी की वसूली केवल विरासत में मिली संपत्ति तक ही सीमित: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

5 April 2026 12:27 PM IST

  • स्टांप शुल्क की कमी की वसूली केवल विरासत में मिली संपत्ति तक ही सीमित: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 के तहत स्टांप शुल्क की कमी (deficiency) की वसूली मृत व्यक्ति के कानूनी वारिसों से केवल उतनी ही की जा सकती है, जितनी संपत्ति उन्हें विरासत में मिली हो।

    जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र ने स्पष्ट किया कि U.P. Revenue Code, 2006 की धारा 181 के प्रावधान लागू होंगे, जिसके अनुसार वसूली की कार्रवाई वारिसों के खिलाफ जारी रह सकती है, लेकिन उनकी जिम्मेदारी केवल विरासत में मिली संपत्ति तक सीमित होगी।

    मामला क्या था?

    याचिकाकर्ताओं के पिता ने 2020 में एक बिक्री विलेख (sale deed) किया था, जिसके बाद 2022 में स्टांप शुल्क की कमी का मामला शुरू हुआ और जुर्माना भी लगाया गया। ₹16,55,150 की वसूली का प्रमाण पत्र जारी हुआ। इस बीच पिता ने अपील (revision) दाखिल की, लेकिन सुनवाई के दौरान उनका निधन हो गया। बाद में याचिकाकर्ता उनके स्थान पर पक्षकार बने, और 2025 में अपील खारिज हो गई।

    कोर्ट का अवलोकन:

    अदालत ने कहा कि सिविल कोर्ट द्वारा बिक्री विलेख रद्द किए जाने से स्टांप अधिनियम की कार्यवाही खत्म नहीं होती, क्योंकि स्टांप शुल्क की देनदारी दस्तावेज के निष्पादन (execution) की तारीख से तय होती है।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि यह तय करना कि याचिकाकर्ताओं को कितनी संपत्ति विरासत में मिली, एक तथ्यात्मक प्रश्न है, जिसे रिट याचिका में तय नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट के निर्देश:

    कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आगरा के कलेक्टर के समक्ष आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया और अपनी आयकर रिटर्न (ITR) भी प्रस्तुत करने को कहा। कलेक्टर को सुनवाई का अवसर देकर यह तय करने को कहा गया कि कितनी राशि वसूल की जा सकती है।

    साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता विरासत में मिली किसी भी संपत्ति को बेच या हस्तांतरित नहीं करेंगे।

    इसी के साथ, रिट याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

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