इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध रूप से बेदखल की गई महिला को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश दिया; सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश
Praveen Mishra
6 Jan 2026 2:29 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महिला और उसके तीन नाबालिग बच्चों को अवैध रूप से घर से बेदखल किए जाने के मामले में बड़ी राहत देते हुए रु. 1 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने संबंधित संपत्ति का कब्ज़ा पुनः बहाल करने का निर्देश भी जारी किया।
इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए आदेश की प्रति मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया, ताकि उस सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जा सके, जिसने प्रतिवादी के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक आदेश देकर बिना सुनवाई का अवसर दिए याचिकाकर्ता को संपत्ति से बेदखल करा दिया था।
जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों और ट्रायल कोर्ट द्वारा किया गया यह कदम अधिकार क्षेत्र से परे और शक्ति के दुरुपयोग के समान है। अदालत ने टिप्पणी की:
“ट्रायल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया और प्रशासनिक अधिकारियों ने राजस्व टीम बनाकर कब्ज़ा दिलाने की कार्रवाई की, जो पूर्णतः अवैध और प्रशासनिक शक्तियों का घोर दुरुपयोग है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले को जिस जल्दबाजी में निपटाया गया, उससे आदेशों की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है और यह प्रशासनिक जांच का विषय है।
मामला क्या था?
याचिकाकर्ता अपने पति, सास-ससुर और बच्चों के साथ उक्त संपत्ति में रहती थी और वहीं पर ब्यूटी पार्लर और दुकान भी चलाती थी। आरोप है कि उसके पति और देवर को प्रतिवादी नंबर-8, जो CJM कोर्ट में पेशकार है, ने अपने प्रभाव का उपयोग कर बहला-फुसलाकर ग़लत तरीके से बिक्री विलेख करा लिया।
इसके बाद प्रतिवादी ने तहसील और पुलिस की मदद से जबरन बेदखली की कोशिश की, लेकिन महिला ने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह उनका पैतृक घर है और वह अपने तीन छोटे बच्चों (3 से 8 वर्ष) के साथ वहीं रहती है। बाद में प्रतिवादी ने स्थायी निषेधाज्ञा का मुकदमा दायर किया और ट्रायल कोर्ट ने एकतरफा अंतरिम आदेश पास कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने टीम भेजकर महिला को घर से बाहर करा दिया।
कोर्ट ने कहा कि न तो ट्रायल कोर्ट ने संपत्ति का कब्ज़ा दिलाने का आदेश दिया था और न ही प्रतिवादी को सुना गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
कोर्ट का अंतिम आदेश
महिला को संपत्ति का कब्ज़ा वापस दिलाया जाए
प्रतिवादी से रु. 1,00,000 क्षतिपूर्ति दिलवाई जाए
अवैध कार्रवाई से हुए मानसिक आघात को अदालत ने स्वीकार किया
सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच पर विचार का निर्देश
अदालत ने कहा कि यह मामला न्यायिक तथा प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इसकी जांच आवश्यक

