UP में हुक्का बार पर रोक, निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी नहीं दे सकते हुक्का सर्विस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Praveen Mishra
29 Sept 2026 2:15 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में हुक्का बार संचालित नहीं किए जा सकते और रेस्टोरेंट के निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी हुक्का सर्विस नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी स्थान को धूम्रपान के लिए निर्धारित किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वहां रेस्टोरेंट ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराने की सेवा दे सकता है।
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने हुक्का बार और रेस्टोरेंट में हुक्का सर्विस से संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
क्या निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र (Designated Smoking Area) में हुक्का पी सकते हैं?
हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या रेस्टोरेंट अपने निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध करा सकते हैं।
कोर्ट ने इसका जवाब नकारात्मक में दिया।
खंडपीठ ने Cigarettes and Other Tobacco Products Act, 2003 (COTPA) और Prohibition of Smoking in Public Places Rules, 2008 के 2017 में संशोधित Rule 4(3) का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में धूम्रपान की अनुमति होने के बावजूद वहां किसी भी प्रकार की “service” की अनुमति नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान सामान्य रूप से प्रतिबंधित है और Designated Smoking Area इस प्रतिबंध का अपवाद है। लेकिन यह अपवाद रेस्टोरेंट को हुक्का सर्विस उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं देता।
हुक्का सर्विस को “Self-Service” बताने की दलील खारिज
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि रेस्टोरेंट हुक्का तैयार करके ग्राहक को दे सकते हैं और उसके बाद ग्राहक खुद उसका इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए इसे “self-service” माना जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि हुक्का तैयार करने में कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं—उपकरण को जोड़ना, तंबाकू रखना, बेस में पानी भरना, फॉयल तैयार करना और गर्म कोयला रखना। इसके अलावा कोयला बदलना, राख हटाना और तंबाकू बदलना जैसी गतिविधियों की भी आवश्यकता पड़ती है।
इसलिए कोर्ट ने माना कि हुक्का तैयार करने और संचालित करने की प्रक्रिया में विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है और इसे सामान्य self-service नहीं माना जा सकता।
“हुक्का सिर्फ उपकरण का किराया नहीं”
याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क भी दिया कि ग्राहक को हुक्का उपकरण उपलब्ध कराना केवल rental है, न कि कोई service।
हाईकोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि सामान्य किराये में वस्तु का कब्जा और नियंत्रण ग्राहक को मिल जाता है। लेकिन हुक्का बार में ग्राहक को हुक्का Designated Smoking Area के भीतर ही इस्तेमाल करना होता है।
खंडपीठ ने कहा कि हुक्का तैयार करना, जोड़ना, ग्राहक को देना, जलाना, कोयला बदलना और उसका रखरखाव करना—ये सभी गतिविधियां मिलकर “service” का स्वरूप लेती हैं।
नॉन-स्मोकर का स्वच्छ हवा में सांस लेना मौलिक अधिकार
फैसले में हाईकोर्ट ने अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(g) के बीच संतुलन पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति का स्वच्छ हवा में सांस लेना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी प्रतिष्ठान के व्यापार करने के अधिकार का इस्तेमाल गैर-धूम्रपान करने वालों के इस मौलिक अधिकार को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
2017 के संशोधन के बाद बदली स्थिति
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Narinder S. Chadha v. Municipal Corporation of Greater Mumbai फैसले का भी उल्लेख किया।
अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के समय Rule 4(3) की भाषा वर्तमान प्रावधान से अलग थी। 2017 में नियम में संशोधन के बाद अब किसी भी Smoking Area में “No service” की व्यवस्था है।
इसी बदलाव को महत्वपूर्ण मानते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पुराने प्रावधान की व्याख्या को वर्तमान संशोधित नियम पर लागू नहीं किया जा सकता।
हुक्का बार का लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं
हाईकोर्ट ने हालांकि याचिकाकर्ताओं की इस दलील को स्वीकार किया कि Food Safety Department और Municipal Corporation के पास हुक्का बार संचालित करने के लिए अलग लाइसेंस जारी करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
वहीं, अदालत ने COTPA के तहत पुलिस की कार्रवाई की शक्तियों को चुनौती देने वाली दलील को खारिज कर दिया।
पीठ ने कहा कि COTPA की धारा 12, 13 और 15 पुलिस अधिकारियों को अधिनियम के प्रभावी प्रवर्तन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की शक्ति देती हैं।
यूपी को कड़े कदम उठाने की उम्मीद
कोर्ट ने गुजरात, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में हुक्का बार को लेकर बनाए गए प्रावधानों का भी उल्लेख किया।
पीठ ने कहा कि वह उम्मीद करती है कि उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा, जिसमें Designated Smoking Areas में हुक्का सर्विस के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने पर विचार शामिल है।
कोर्ट ने हुक्का सेवन से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का भी उल्लेख किया और हुक्का को सिगरेट से कम हानिकारक मानने की धारणा पर ध्यान दिलाया।
अदालत ने फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आवश्यक कार्रवाई और अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने हुक्का बार के संचालन और रेस्टोरेंट में हुक्का सर्विस से संबंधित सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

