हनी-ट्रैप वसूली गिरोह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी पुलिस को जांच और कड़ी निगरानी के निर्देश

Praveen Mishra

2 April 2026 4:14 PM IST

  • हनी-ट्रैप वसूली गिरोह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी पुलिस को जांच और कड़ी निगरानी के निर्देश

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मेरठ जोन में संचालित कथित हनी-ट्रैप और ब्लैकमेल गिरोह की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को इस पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया।

    जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरून सक्सेनाकी खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के गिरोह का अस्तित्व, जो महिलाओं के जरिए लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल करता है, समाज की “गंभीर रूप से चिंताजनक स्थिति” को दर्शाता है।

    अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक सभ्य समाज में जीवन यापन करना मुश्किल हो जाएगा।

    मामला क्या था?

    दरअसल, अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक महिला और चार अन्य आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द (quash) करने की मांग की थी।

    आरोपों के अनुसार, पहली याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता को संपर्क कर बिजनौर के एक होटल में बुलाया, जहां उनके बीच शारीरिक संबंध बनाए गए। इस दौरान छिपकर वीडियो बना लिया गया, जिसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से ₹10 लाख की मांग करते हुए ब्लैकमेल करना शुरू किया।

    इसके बाद शिकायतकर्ता को एक स्थान पर बुलाया गया, जहां दो पुलिसकर्मी (जो इस मामले में आरोपी भी हैं) मुख्य आरोपी के साथ मिले हुए थे। उन्होंने कथित तौर पर वीडियो दिखाकर पैसे की मांग की।

    हालांकि, शिकायतकर्ता ने पैसे देने से इनकार कर दिया और मामले की सूचना पुलिस को दे दी।

    हाईकोर्ट के निर्देश

    मामले को “अत्यंत गंभीर” बताते हुए हाईकोर्ट ने मेरठ जोन के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को सतर्क रहने और कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।

    साथ ही, कोर्ट ने रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को आदेश की प्रति Director General of Police, मेरठ जोन के IG और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को भेजने का निर्देश दिया।

    अंत में, याचिका को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया गया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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