₹6.33 करोड़ रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाजी इकबाल के खिलाफ जांच STF से SFIO को सौंपी, FIR रद्द करने से इनकार
Praveen Mishra
17 July 2026 4:33 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹6.33 करोड़ के कथित रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए जांच उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) से लेकर सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को सौंपने का आदेश दिया है।
जस्टिस चंद्रधारी सिंह और जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि जब आरोप स्पष्ट हों और प्रथम दृष्टया अपराध बनता हो, तब शुरुआती चरण में आपराधिक कार्यवाही को रोका नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि एफआईआर रद्द करने से शिकायतकर्ता के पास कोई प्रभावी कानूनी उपाय नहीं बचेगा।
मामला नवेद अहमद की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2013-14 के दौरान उन्होंने एम/एस एनचेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को ग्रेटर नोएडा में परियोजना के लिए ₹6.33 करोड़ दिए थे, लेकिन न तो परियोजना विकसित हुई और न ही कंपनी ने प्राधिकरण को बकाया राशि का भुगतान किया, जिसके बाद आवंटन रद्द कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि इसी कंपनी और उससे जुड़े कथित कॉर्पोरेट फ्रॉड की जांच पहले से SFIO कर रही है और मामला दिल्ली की विशेष अदालत में लंबित है।
अदालत ने कहा कि यदि STF समान तथ्यों की अलग जांच करती रही तो एक ही कथित धोखाधड़ी की समानांतर जांच होगी, जिससे जांच बिखर जाएगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 212(2) के अनुसार SFIO को जांच सौंपे जाने के बाद अन्य एजेंसियां समान मामले की जांच जारी नहीं रख सकतीं।
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता के ₹6.33 करोड़ के विशेष लेन-देन की अलग से जांच नहीं हुई थी। इसलिए STF को सभी दस्तावेज और केस डायरी SFIO को सौंपने का निर्देश दिया गया।
साथ ही SFIO को BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच कर आवश्यकता पड़ने पर दिल्ली की विशेष अदालत में पूरक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया।


