हैबियस कॉर्पस का इस्तेमाल पति को पेश कराने के लिए नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Praveen Mishra
6 April 2026 1:06 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मेंटेनेंस (भरण-पोषण) के मामले में वारंट से बच रहे पति को कोर्ट में पेश कराने के लिए हैबियस कॉर्पस याचिका का उपयोग नहीं किया जा सकता।
जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित फैमिली कोर्ट को ही आवश्यक कठोर (coercive) कदम उठाने का अधिकार है।
मामला क्या था?
आजमगढ़ की फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2021 में पति को पत्नी और बेटी को भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। लेकिन पति भुगतान से बच रहा था और उसके खिलाफ वारंट जारी होने के बावजूद वह सामने नहीं आ रहा था।
पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की कि पति को खोजकर गिरफ्तार किया जाए और कोर्ट के सामने पेश किया जाए। साथ ही पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और ₹5 लाख मुआवजे की भी मांग की गई।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि पति वारंट से बच रहा है, हैबियस कॉर्पस जारी नहीं किया जा सकता। यह उपाय गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पति की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए फैमिली कोर्ट खुद कानूनी कदम उठा सकता है।
फैसला
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि उचित कार्रवाई के लिए संबंधित फैमिली कोर्ट का ही सहारा लिया जाना चाहिए।

