इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे की मौत की CBI जांच की मांग करने वाली याचिका खारिज की

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे की मौत की CBI जांच की मांग करने वाली याचिका खारिज की

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को भोजपुरी एक्ट्रेस और मॉडल आकांक्षा दुबे की मां मधु दुबे की याचिका को रिकॉर्ड पर लिया। मधु दुबे ने मार्च 2023 में वाराणसी के एक होटल के कमरे में अपनी बेटी की मौत की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जांच कराने की मांग की थी।

    जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II की बेंच ने कहा कि यह तर्क कि एक्ट्रेस की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी, गलतफहमी पर आधारित है।

    बेंच ने आगे कहा कि मृतक का शव न होने की स्थिति में घटना के तरीके या मौत के कारण की आगे जांच नहीं की जा सकती।

    कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट या जांच अधिकारी द्वारा सौंपी गई पुलिस रिपोर्ट/चार्जशीट के खिलाफ कोई विरोध याचिका दायर नहीं की गई।

    कोर्ट ने मधु दुबे द्वारा दायर एक क्रिमिनल मिसलेनियस रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया। उन्होंने मांग की थी कि CBI को वाराणसी के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की जांच अपने हाथ में लेने और आगे की जांच या दोबारा जांच करने का निर्देश दिया जाए।

    सुनवाई के दौरान, प्रतिवादियों में से एक के वकील ने बताया कि जांच अधिकारी ने कानूनी जांच पूरी कर ली थी और 3 जून 2023 को IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत चार्जशीट दायर की थी।

    अधिकार-क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट ने 6 जून 2023 को इस मामले का संज्ञान लिया था।

    इस दलील का विरोध करते हुए मधु दुबे के वकील सौरभ तिवारी ने तर्क दिया कि मृतक के प्राइवेट पार्ट्स में स्पर्मेटोज़ोआ (शुक्राणु) पाए गए थे और फोरेंसिक जांच में उनका मिलान आरोपी से हुआ था।

    इसके आधार पर वकील तिवारी ने तर्क दिया कि मौत हत्या थी, आत्महत्या नहीं।

    हालांकि, बेंच ने पूछा कि क्या मृतक के शव की दोबारा मेडिकल जांच की मांग करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के सामने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खिलाफ कोई आपत्ति दर्ज कराई गई।

    वकील तिवारी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि ऐसी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या 'भगवंत सिंह बनाम पुलिस कमिश्नर और अन्य (1985)' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए जांच अधिकारी द्वारा दाखिल चार्ज शीट के खिलाफ संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने कोई प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दाखिल की गई।

    वकील तिवारी ने फिर माना कि पुलिस रिपोर्ट/चार्ज शीट के खिलाफ कोई प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल नहीं की गई।

    बेंच ने देखा कि चार्ज शीट IPC की धारा 306 के तहत दाखिल की गई थी, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है।

    कोर्ट ने कहा,

    "ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए हमारी यह राय है कि इस रिट पिटीशन में मृतक की मौत को हत्या (Homicidal) बताने और आत्महत्या (Suicidal) न मानने के समर्थन में दी गई सभी दलीलें पूरी तरह से गलतफहमी पर आधारित हैं, क्योंकि मृतक का शव (Corpus) न मिलने की स्थिति में, घटना के तरीके या मौत के कारण की आगे कोई जांच नहीं की जा सकती।"

    Case Title : Madhu Dubey vs. State Of U.P. And 5 Others 2026 LiveLaw (AB) 835

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