अवमानना मामले में केवल पेश होकर जवाब देने के आदेश के खिलाफ Contempt Act की धारा 19 के तहत अपील नहीं होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Praveen Mishra
30 Jun 2026 3:49 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अवमानना न्यायालय द्वारा किसी कथित अवमाननाकर्ता को केवल उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश देना कि उसके खिलाफ अवमानना के आरोप क्यों न तय किए जाएं, ऐसा आदेश नहीं है जिसके खिलाफ Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 19(1)(a) के तहत अपील की जा सके।
हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रभावित पक्ष के पास कोई उपाय नहीं होने की स्थिति नहीं है और वह लेटर्स पेटेंट अपील (Letters Patent Appeal - LPA) दाखिल कर सकता है।
मामला एक अवमानना याचिका से जुड़ा था, जिसमें एकल न्यायाधीश ने अपीलकर्ता सहित तीन लोगों को अदालत में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि उनके खिलाफ अवमानना के आरोप क्यों न तय किए जाएं। इस अंतरिम आदेश को अपीलकर्ता ने Contempt of Courts Act की धारा 19(1) के तहत चुनौती दी।
अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि धारा 19(1) के तहत अवमानना संबंधी अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट द्वारा पारित "किसी भी आदेश" के खिलाफ अपील का प्रावधान है।
वहीं, प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि विवादित आदेश से किसी पक्ष के अधिकारों का अंतिम निर्धारण नहीं हुआ है और जब तक अवमानना के लिए दंड नहीं दिया जाता, तब तक धारा 19 के तहत अपील सुनवाई योग्य नहीं होती। इस संबंध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के Midnapore Peoples' Co-op. Bank Ltd. v. Chunilal Nanda फैसले का हवाला दिया।
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के उक्त निर्णय पर भरोसा करते हुए कहा कि वर्तमान मामले में अब तक कथित अवमाननाकर्ताओं को कोई दंड नहीं दिया गया है। एकल न्यायाधीश ने केवल उन्हें उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि उनके खिलाफ आरोप क्यों न तय किए जाएं।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि धारा 19(1)(a) के तहत दायर अपील सुनवाई योग्य नहीं है और इसे खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता चाहे तो लेटर्स पेटेंट अपील का वैकल्पिक कानूनी उपाय अपना सकता है।

