अनुकंपा नियुक्ति की मंजूरी कायम रहने तक आपत्तियों के आधार पर वेतन नहीं रोक सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

  • अनुकंपा नियुक्ति की मंजूरी कायम रहने तक आपत्तियों के आधार पर वेतन नहीं रोक सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर अनुकंपा नियुक्ति को सक्षम अधिकारी ने मंजूरी दी है और उस मंजूरी को कभी वापस या रद्द नहीं किया गया, तो कर्मचारी को उससे मिलने वाली सैलरी से वंचित नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा कि कानून की नजर में प्रभावी प्रशासनिक आदेश को उसके परिणामी लाभ रोककर निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता।

    मामले में याचिकाकर्ता के पति की 2001 में सेवा के दौरान मृत्यु हुई थी। उन्हें अनुकंपा के आधार पर 2006 में चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्त किया गया और 6 सितंबर 2006 को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नियुक्ति को मंजूरी दी।

    बाद में अधिकारियों की आपत्ति के आधार पर उनका वेतन रोक दिया गया।

    कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति की मंजूरी कभी रद्द नहीं हुई, इसलिए बाद में उसी मुद्दे को दोबारा उठाकर वेतन रोकना कानूनी रूप से उचित नहीं है।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए।

    अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ता को बिना मौका दिए दस्तावेजों पर भरोसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

    हाईकोर्ट ने संबंधित आदेशों को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को नियुक्ति से जुड़े लाभ देने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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