बरेली नमाज़ विवाद—बड़े जमावड़े पर रोक, शांति भंग हुई तो राज्य कार्रवाई को स्वतंत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

1 April 2026 4:53 PM IST

  • बरेली नमाज़ विवाद—बड़े जमावड़े पर रोक, शांति भंग हुई तो राज्य कार्रवाई को स्वतंत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में, जिसमें एक व्यक्ति को अपने घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के आरोप पर पहले 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की गई थी, अब यह निर्देश दिया है कि वह अपने आवास पर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र न करे।

    यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने 25 मार्च को पारित किया।

    मामला बरेली निवासी हसीन खान से जुड़ा है, जिन्हें पहले एक अन्य पीठ द्वारा सुरक्षा दी गई थी। हालांकि, बाद में बेंच के पुनर्गठन के बाद मामले की सुनवाई नई पीठ के समक्ष हुई।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता सुरक्षा के नाम पर उसका दुरुपयोग कर रहा है और प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लोग उसके घर पर नमाज़ अदा करने के लिए एकत्र हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र की शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इस संबंध में राज्य ने फोटो सहित साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।

    इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि आगे से उनके मुवक्किल के घर पर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा नहीं होगा। अदालत ने इस आश्वासन को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि भविष्य में इसका उल्लंघन होता है और क्षेत्र की शांति भंग होने की स्थिति उत्पन्न होती है, तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 16 जनवरी 2026 को याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी पुलिस चालान को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही, याचिकाकर्ता की ओर से सुरक्षा की आवश्यकता न होने की बात कहे जाने पर उसे प्रदान की गई सुरक्षा भी वापस लेने का निर्देश दिया गया।

    इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को भी समाप्त कर दिया।

    इस प्रकार, अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक शांति के बीच संतुलन बनाए रखते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।

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