स्थायी समायोजन के बाद कर्मचारी नए कैडर का सदस्य, शुरुआती नियुक्ति के आधार पर लाभ नहीं रोके जा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

  • स्थायी समायोजन के बाद कर्मचारी नए कैडर का सदस्य, शुरुआती नियुक्ति के आधार पर लाभ नहीं रोके जा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी का एक बार किसी नए कैडर में स्थायी समायोजन (Permanent Absorption) हो जाने के बाद वह सभी सेवा संबंधी उद्देश्यों के लिए उसी कैडर का सदस्य माना जाएगा। उसकी प्रारंभिक नियुक्ति किस कैडर में हुई थी, यह आधार बनाकर उसे नए कैडर के वित्तीय या सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस इरशाद अली ने कहा कि स्थायी समायोजन केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि कर्मचारी का नए कैडर में पूर्ण एकीकरण (Complete Integration) है। इसके बाद पुराने पद पर उसका लियन (Lien) और उस कैडर से जुड़े सभी सेवा संबंधी प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। कर्मचारी के अधिकार, पदोन्नति, दायित्व और वित्तीय लाभ उसी कैडर के नियमों से तय होंगे, जिसमें उसका समायोजन हुआ है।

    मामले में याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1967 में सर्किल कैडर में जूनियर नोटर एवं ड्राफ्टर के रूप में हुई थी। वर्ष 1978 में उनका स्थायी समायोजन मुख्य अभियंता (Chief Engineer) कैडर में कर दिया गया। बाद में उन्हें पदोन्नति मिली और वर्ष 2001 में वे ऑफिस सुपरिंटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्हें पेंशन भी मुख्य अभियंता कैडर के कर्मचारी के रूप में दी गई।

    याचिकाकर्ता का आरोप था कि वर्ष 2007 के हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्य अभियंता कैडर के अन्य कर्मचारियों को संशोधित द्वितीय और तृतीय समयबद्ध वेतनमान (Time-Bound Pay Scales) का लाभ दिया गया, लेकिन उनकी प्रारंभिक नियुक्ति सर्किल कैडर में होने का हवाला देकर उन्हें यह लाभ नहीं दिया गया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि जब उत्तरदाताओं ने याचिकाकर्ता को मुख्य अभियंता कैडर का कर्मचारी मानते हुए पदोन्नति, सेवानिवृत्ति और पेंशन का लाभ दिया, तो केवल वित्तीय लाभों से वंचित करने के लिए उसकी शुरुआती नियुक्ति का आधार नहीं लिया जा सकता। अदालत ने इसे मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना।

    इसी आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता का दावा खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया और उत्तरदाताओं को निर्देश दिया कि उन्हें मुख्य अभियंता कैडर का सदस्य मानते हुए संशोधित दूसरे और तीसरे समयबद्ध वेतनमान के साथ वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और अन्य सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।

    इस खबर को अंग्रेज़ी में पड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story