ऑनर किलिंग मामले में बुआ-फूफा को अग्रिम जमानत से इनकार, सच सामने लाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

4 Aug 2026 1:22 PM IST

  • ऑनर किलिंग मामले में बुआ-फूफा को अग्रिम जमानत से इनकार, सच सामने लाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के चर्चित ऑनर किलिंग मामले में मृतका की बुआ और फूफा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और सच्चाई तक पहुंचने के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों पिछले सात महीने से फरार चल रहे थे।

    जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण और विवेकाधीन राहत है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि आरोपियों के खिलाफ मामला नहीं बनता।

    क्या है मामला?

    अभियोजन के अनुसार, मृतका अंशु यादव का एक युवक से प्रेम संबंध था, जिसका उसके परिवार ने विरोध किया। एफआईआर के मुताबिक, घटना से एक दिन पहले 24 अक्टूबर 2025 को अंशु ने 29 सेकंड का एक वीडियो भेजकर कहा था कि उसके परिवार वाले उसे मारना चाहते हैं। अगले दिन उसकी हत्या कर शव को कार से ले जाकर इटावा के सुनवारा गांव के पास यमुना नदी में फेंक दिया गया।

    जांच के दौरान सह-आरोपी और मृतका के पिता, जो उत्तर प्रदेश पुलिस के सेवानिवृत्त एसएचओ हैं, की निशानदेही पर शव बरामद किया गया। मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं होने पर हड्डियों और बालों के नमूने डीएनए जांच के लिए एफएसएल आगरा भेजे गए हैं।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी

    याचिकाकर्ताओं ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उन्हें केवल रिश्तेदार होने के कारण फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। वहीं राज्य सरकार ने कहा कि मृतका ने अपनी मौत से पहले बनाए गए वीडियो में स्वयं दोनों का नाम लिया था और जांच में उनके यमुना पुल पर मौजूद होने के संकेत भी मिले हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के Bhagwan Dass v. State (NCT of Delhi) सहित अन्य फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऑनर किलिंग जैसे मामलों को अत्यंत गंभीरता से देखा जाना चाहिए। चूंकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आरोपी जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे हैं, इसलिए इस समय अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है।

    इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोपों का पर्याप्त आधार मौजूद है। इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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