13 वर्षीय रेप पीड़िता की प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन के आदेश के बावजूद C-Section, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए
Praveen Mishra
24 Sept 2026 9:36 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 वर्षीय रेप पीड़िता की प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन के अपने आदेश के बावजूद C-Section किए जाने के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संबंधित डॉक्टरों को आदेश का पालन न करने के लिए “जानबूझकर लापरवाही” का दोषी माना।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से जांच कर दो सप्ताह में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की गर्भावस्था करीब 29 सप्ताह 2 दिन बताई थी। पीड़िता ने गर्भावस्था जारी नहीं रखने की इच्छा जताई थी। उसकी उम्र, परिस्थितियों और शारीरिक-मानसिक स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने 21 सितंबर को S.R.N. अस्पताल, प्रयागराज को मेडिकल टर्मिनेशन कराने का निर्देश दिया था।
हालांकि, 22 सितंबर को टर्मिनेशन की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन वह सफल नहीं हुई। इसके बाद C-Section कर बच्चे का जन्म कराया गया। ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर डॉ. ऐमन अब्बासी कोर्ट को यह नहीं बता सकीं कि C-Section का निर्देश किसने दिया था। वहीं, स्त्री रोग विभाग की HOD डॉ. अमृता चौरसिया उस समय शहर से बाहर थीं।
कोर्ट ने कहा कि डॉ. अमृता चौरसिया और संबंधित डॉक्टर प्रथम दृष्टया आदेश का पालन न करने में दोषी हैं और उनके खिलाफ उचित कार्यवाही की जा सकती है।
कोर्ट ने बच्चे को चिल्ड्रन हॉस्पिटल की निगरानी में रखने और उसकी अनुमति के बिना किसी को न सौंपने का निर्देश दिया। अस्पताल को मां और बच्चे के इलाज का खर्च भी उठाना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

