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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बिल ऑफ़ एंट्री में जो मूल्य घोषित हुआ है उसके आधार पर ही कर योग्य मूल्य का निर्धारण हो सकता है [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
23 Dec 2018 11:27 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बिल ऑफ़ एंट्री में जो मूल्य घोषित हुआ है उसके आधार पर ही कर योग्य मूल्य का निर्धारण हो सकता है [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीमा शुल्क अधिनियम के लिए कर योग्य मूल्य का निर्धारण बिल ऑफ़ एंट्री में घोषित मूल्य के आधार पर ही हो सकता है।

न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने Commissioner of Central Excise and Service Tax, Noida vs. Sanjivani Non-Ferrous Trading Pvt.Ltd. मामले में यह फ़ैसला सुनाया। अधिकारियों ने इस मामले में बिल ऑफ़ एंट्री में घोषित मूल्य को ख़ारिज कर दिया था और कर योग्य मूल्य को बढ़ाकर इसका आकलन दुबारा किया गया।न्यायाधिकरण ने इस आकलन को रद्द कर दिया था और राजस्व विभाग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।

पीठ ने कहा कि सामान्यतया, आकलनकर्ता अधिकारी को उस क़ीमत के आधार पर आकलन करना पड़ता है जो चुकाया जाता है और उसको वह करयोग्य मूल्य मानता है और उसे ही उस वस्तु की क़ीमत मानी जा सकती है। यह सामान्य कार्रवाई है और इसका आकलनकर्ता अधिकारी को पालन करना है।"

कोर्ट ने यह भी कहा है कि कब इस घोषित मूल्य को परे रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा, "बिल्ज़ ऑफ़ एंट्री में जो कारोबार दिखाया गया है उससे अगर यह पता लगता है कि वही वस्तु उसी समय के दौरान ऊँची क़ीमत पर बेची गई है या अगर कोई ख़रीददार या विक्रेता आपस में सम्बंधित हैं। इस तरह के प्रावधान को लागू करने के लिए यह ज़रूरी है कि असेसिंग ऑफ़िसर को यह कारण बताना होगा की बिल ऑफ़ एंट्री के तहत घोषित मूल्य को क्यों ख़ारिज किया जा रहा है; इस बात को स्थापित करने के लिए मूल्य एकमात्र आधार नहीं है…"

कोर्ट ने अपील ख़ारिज करते हुए कहा कि आकलन योग्य मूल्य का निर्धारण चुकाई गई मूल्य के आधार पर की जानी चाहिए जिसका बिल ऑफ़ एंट्री में उल्लेख किया गया है और इसके लिए अस्सेसिंग अधिकारी को पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। चूँकि अस्सेसिंग अधिकारी ने इस तरह की किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है इसलिए यह आदेश ग़लत है।"


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