Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

बीसीआई के लिए प्रतिनिधियों के चुनाव को ग़लत ठहराने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
25 Nov 2018 11:55 AM GMT
बीसीआई के लिए प्रतिनिधियों के चुनाव को ग़लत ठहराने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
x

पीठ ने कहा, किसी सही बैठक के लिए ज़रूरी है कि बैठक की नोटिस के साथ एजेंडा का भी ज़िक्र हो

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को सही ठहराया है जिसमें उसने 2014 में राज्य बार काउंसिल के चुनाव को रद्द कर दिया था। यह चुनाव बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधि चुनने के लिए हुआ था।

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने अधिवक्ता सुनील गुप्ता की चुनाव याचिका को ख़ारिज कर दिया था और कहा था कि अधिवक्ता प्रताप मेहता को बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधि चुने जाने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने हाईकोर्ट के फ़ैसले को सही बताया और दुबारा चुनाव का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के प्रतिनिधियों के चुनाव का विनियमन बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया क़ानून के तहत करता है और बीसीआई के नियम 7 के तहत यह ज़रूरी है कि राज्य बार काउंसिल का सचिव इसका नोटिस दे और चुनाव की तिथि निर्धारित करे।

कोर्ट ने कहा, “16.07.2014 और 19.07.2014 को जो नोटिस जारी किए गये थे उसे बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के प्रतिनिधि के चुनाव के लिए नियम 7 के तहत नोटिस नहीं कहा जा सकता। इसलिए 2 अगस्त 2014 को जो चुनाव हुआ उसके बारे में यह नहीं कहा जा सकता कि यह नियम 7 के अनुसार हुआ।”

पीठ ने कहा कि कोई बैठक क़ानूनन सही है इसके लिए ज़रूरी है कि बैठक के लिए नोटिस के साथ बैठक के एजेंडे का भी ज़िक्र किया जाए। सिर्फ़ स्थगित की गई बैठकों के लिए ही ताज़े एजेंडी का ज़िक्र ज़रूरी नहीं है। 16.07.2014 और 19.07.2014 को जो नोटिस जारी किए गये थे उसमें एजेंडा नहीं था और बैठक को स्थगित बैठक भी नहीं माना गया इसलिए इस बैठक के लिए एजेंडा का होना ज़रूरी था। 2 अगस्त 2014 को आर कोई चुनाव होना था तो इसके लिए एजेंडा बताना ज़रूरी था।”

इस मामले के सुप्रीम कोर्ट में लम्बित रहने के दौरान राज्य बार काउंसिल ने इस पद के लिए ताज़ा चुनाव कराया। अब अपील को ख़ारिज करते हुए पीठ ने कहा कि 12 अगस्त 2018 को जो चुनाव कराया गया उसे सभी सम्बंधित लोगों को  प्रभावी बनाना चाहिए।


 
Next Story