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पति को अपनी पत्नी और अपने बच्चे का भरण पोषण करना है भले ही इसके लिए वह भीख माँगे, उधार ले या चोरी करे : पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
13 Nov 2018 4:00 PM GMT
पति को अपनी पत्नी और अपने बच्चे का भरण पोषण करना है भले ही इसके लिए वह भीख माँगे, उधार ले या चोरी करे : पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट [आर्डर पढ़े]
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“एक पति का पहला और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कर्तव्य है अपनी पत्नी और अपने बच्चे का भरण पोषण। भले ही उसको इसके लिए भीख माँगना पड़े, उधार लेनी पड़े या चोरी करनी पड़े।” पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक फ़ैसले में यह बात कही।

न्यायमूर्ति एचएस मदान ने पारिवारिक अदालत के एक फ़ैसले को पति द्वारा दी गई चुनौती पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। पारिवारिक अदालत ने अपनी पत्नी को गुज़ारे की राशि नहीं देने पर पति को जेल भेजने का आदेश सुनाया था।

वर्तमान मामले में पारिवारिक अदालत ने पति को 12 महीने के सिविल कारावास की सज़ा सुनाई थी क्योंकि उसने अपनी पत्नी को गुज़ारे की 91,000 रुपए की राशि का भुगतान नहीं किया था।

उसने हाईकोर्ट में इस आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी कि वह सिर्फ़ एक महीने की जेल की सज़ा भुगत सकता है। पीठ ने उसकी इस दलील को ख़ारिज कर दिया और इस बारे में इससे पहले सुनित कुमार बनाम रीता मामले में आए फ़ैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि हर महीने का भुगतान नहीं करने के लिए एक महीने की सिविल क़ैद की अधिकतम सज़ा दी जा सकती है।

कोर्ट ने कहा, “किसी व्यक्ति को सज़ा देना वास्तव में उसको ‘आदेश को मानने के लिए बाध्य करना’ है। यह दायित्व की संतुष्टि के लिए नहीं है। दायित्व की संतुष्टि तो तभी हो सकती है जब बकाए का भुगतान किया जाए…उसको जेल भेजने का मतलब उसके दायित्वों को समाप्त करना नहीं है जिसके मासिक भुगतान से उसने मना किया है। मासिक भुगतान का आदेश इस लिए दिया गया है ताकि पत्नी और बच्चे की ज़रूरी आर्थिक ज़रूरतें पूरी हो सकें। धन के अभाव में उपेक्षित  पत्नी और उपेक्षित बच्चा ज़िंदा नहीं रह सकता क्योंकि खाने की वस्तुएँ और अन्य आवश्यक चीज़ों को ख़रीदने के लिए उन्हें पैसे चाहिए। एक पति का पहला और सर्वप्रथम कर्तव्य यह है कि वह अपनी पत्नी और बच्चे का भरण पोषण करे।

इस फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया।


 
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