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पासपोर्ट अधिनियम के तहत बिना कारण बताए पासपोर्ट देने से इनकार करना मौलिक अधिकारों पर पाबंदी है : दिल्ली हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
16 Sep 2018 3:53 PM GMT
पासपोर्ट अधिनियम के तहत बिना कारण बताए पासपोर्ट देने से इनकार करना मौलिक अधिकारों पर पाबंदी है : दिल्ली हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों अपने एक फैसले में कहा कि बिना कोई कारण बताए पासपोर्ट जारी करने से इनकार करना या इसका नवीनीकरण नहीं करना संविधान के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों पर पाबंदी लगाना है।

 न्यायमूर्ति विभु बखरू ने जसविंदर सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया। चौहान अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण चाहते हैं।

 चौहान कनाडा में ट्रक चलाते हैं और ऐसा करने का उनके पास वैध कार्यानुमति है। सितम्बर 2016 में उनको कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत ने स्थाई निवासी बनाने का फैसला किया। इसलिए उन्होंने वैंकूवर स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवेदन दिया पर इस बात को लगभग दो साल हो गया, उन्हें आज तक नया पासपोर्ट जारी नहीं किया गया है।

 ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनके आवेदन पर गौर करने के बाद यह पाया गया कि उनके एक रिश्तेदार ने अटलांटा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवा लिया था। केंद्र सरकार का मानना है कि उसने यह फर्जीवाड़ा चौहान के साथ मिलकर किया है।

 केंद्र सरकार ने अब कहा है कि इस मामले की जांच चल रही है और इस जांच के बाद ही चौहान के आवेदन पर गौर किया जाएगा।

 पर कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पासपोर्ट का नवीनीकरण से इनकार करना चौहान को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करना है।

 कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 6 के तहत कुछ आधार पर पासपोर्ट देने से इनकार किया जा सकता है। पर कोर्ट को बताया गया है कि सरकार ने अभी तक पासपोर्ट जारी नहीं करने को लेकर कोई कारण नहीं बताया है।

कोर्ट ने कहा कि चौहान ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए लगभग दो साल पहले आवेदन दिया था और इसमें हो रही देरी के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है क्योंकि इसकी वजह से कनाडा में उनके निवासी होने की स्थिति खतरे में पड़ गई है।

 यद्यपि याचिकाकर्ता के वकील सुश्री गोसाईं  ने बहुत ही ईमानदारी से कहा है कि प्रतिवादी ने अभी तक याचिकाकर्ता के पासपोर्ट का नवीनीकरण करने से इनकार नहीं किया है पर सारी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अगर उसे दो साल हो जाने पर भी नया पासपोर्ट जारी नहीं किया गया है तो इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता है कि उसको पासपोर्ट देने से इनकार कर दिया गया है। किसी नागरिक का मौलिक अधिकार प्रतिवादी या किसी अन्य एजेंसियों द्वारा जांच में लंबा समय लिए जाने का बंधक नहीं हो सकता,” कोर्ट ने कहा।

 इसलिए कोर्ट ने अथॉरिटीज को चौहान के पासपोर्ट के नवीनीकरण का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि अगर जांच के बाद इस बात का आधार बनता है कि चौहान के पासपोर्ट को रद्द करना जनहित में होगा, तो सरकार उनका पासपोर्ट क़ानून के तहत रद्द कर सकती है।

 

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