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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लेफ्ट, राइट, सेंटर सब तरफ रेप का शिकार हो रही हैं लड़कियां

LiveLaw News Network
8 Aug 2018 5:15 AM GMT
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लेफ्ट, राइट, सेंटर सब तरफ रेप का शिकार हो रही हैं लड़कियां
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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग बच्चियों के साथ रेप के मामले में केंद्र और बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में क्या हो रहा है ? लेफ्ट, राइट और सेंटर सब तरफ लड़कियां बलात्कार का शिकार हो रही हैं।हर 6 घंटे में लडकी का रेप हो रहा है।रोजाना चार लडकियों से रेप की घटनाएं हो रही हैं। NCRB के मुताबिक  2016  में 38947 रेप हुए और यह बहुत चिंता का विषय है ।

जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस के एम जोसेफ की बेंच ने बिहार सरकार द्वारा शेल्टर होम का संचालन करने वाले NGO को वित्तीय सहायता देने पर फटकार लगाई।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले कई सालों से बिहार सरकार NGO को फंड देती रही लेकिन उसे ये नहीं पता कि ये फंड वो क्यों दे रही है ? फंड जारी करने से पहले सरकार को NGO की जांच पडताल करनी चाहिए, शेल्टर होम का निरीक्षण करना चाहिए। पीठ ने कहा कि बिना सोशल ऑडिट किए अगर ये चल रहा था तो फिर इस अपराध को राज्य द्वारा प्रायोजित समझा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर एक आरोपी की पत्नी का अकाउंट पीठ को दिखाया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को उसके खिलाफ सोशल मीडिया अकाउंट पर पीडितों के नाम दिए जाने पर कार्रवाई करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंट, इलेक्ट्रानिक व सोशल मीडिया को निर्देश दिए कि  देशभर यौन उत्पीडन के शिकार बच्चों की तस्वीरें, वीडियो किसी भी तरह नहीं दिखाई जाएंगे।

वहीं पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG पिंकी आनंद से पूछा कि केंद्र बताए कि वो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या योजना बना रहा है ? पहले बिहार तो कल यूपी की खबर आई न्यूज चैनल दिखा रहा था। आपके पास भविष्य के लिए क्या योजना है ?  इसे कैसे मॉनीटर किया जाए ?

वहीं बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि टाटा इंस्टीटयूट ऑफ सोशल साइंसेज ( TISS) की रिपोर्ट आने के बाद 9 FIR दर्ज की गईं और इनमें से एक FIR की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।  बिहार सरकार ने कहा कि आपराधिक मामला तो चल ही रहा है जांच हो रही है, पटना हाईकोर्ट द्वारा केस मॉनिटर भी हो रहा है। लेकिन इसका एक सामाजिक पहलू भी जैसे काउंसलिंग कैसे हो ? मुआवजा और पुनर्वास कैसे हो?  इस पर कोर्ट हलफनामा दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का वक्त चाहिए।

वहीं अमिक्स क्यूरी अपर्णा भट्ट और TISS की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट को बताया कि बिहार के 110 शेल्टर होम की जांच की गई जिनमें से 15 की शिकायत की गई। मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम से 41 लड़कियां मुक्त कराई गई हैं। अभी तक किसी को मुआवजा नहीं मिला है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को एक्शन टेकन रिपोर्ट, एम्स को पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट और TISS को पुनर्वास संबंधी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट मामले की सुनवाई 14 को करेगा।

गौरतलब है कि दो अगस्त को मुजफ्फरपुर में शेल्टर होम में 30 से ज्यादा बच्चियों से बलात्कार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान ले लिया था।

जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने  एक सामाजिक कार्यकर्ता की चिट्ठी पर  स्वत : संज्ञान लेते हुए ने केंद्र और बिहार सरकार को नोटिस  जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट ने वकील अपर्णा भट्ट को केस में एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया है। पीठ ने मीडिया में पीड़ितों की तस्वीरें दिखाए जाने पर भी सख्त ऐतराज जताया और आदेश जारी किया कि मीडिया  ब्लर करके या किसी भी तरह पीड़ितों की तस्वीरें नहीं दिखाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने शेल्टर होम की पीडितों के पास जाने पर मीडिया और अन्य प्राधिकरण को भी फटकार लगाई। पीठ ने कहा कि ये क्या हो रहा है ? सब पीडितों का इंटरव्यू ले रहे हैं। उन्हें बच्चों की चिंता नहीं है। कई एजेंसियां इस मुद्दे पर काम कर रही हैं। सब बस उनसे मिलना चाहते हैं। पीठ ने इस मुद्दे पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से भी सहयोग मांगा है।

दरअसल इस मामले के सामने आने के बाद बिहार मे सरगर्मियां तेज हो गई हैं। गुरूवार को बिहार बंद का आयोजन किया गया। विरोधी पार्टियां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साध रही हैं। हालांकि समाज कल्याण विभाग की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत नौ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी को 26 जुलाई को जेल भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की संतुति की है और जांच के लिए सीबीआई की टीम मुजफ्फरपुर पहुंच चुकी है।

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