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लोकपाल की नियुक्ति : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के हलफनामे को ‘असंतोषजनक’ बताकर खारिज किया, प्रशांत भूषण ने कहा, 142 का इस्तेमाल कर लोकपाल नियुक्त करे अदालत

LiveLaw News Network
25 July 2018 4:12 AM GMT
लोकपाल की नियुक्ति : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के हलफनामे को ‘असंतोषजनक’ बताकर खारिज किया, प्रशांत भूषण ने कहा, 142 का इस्तेमाल कर लोकपाल नियुक्त करे अदालत
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लोकपाल की नियुक्ति के मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के हलफनामे को असंतोषजनक करार देते हुए चार हफ्ते में फिर से नया हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर बानुमति और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की बेंच ने केंद्र की उन दलीलों को मानने से इनकार किया जिसमें कहा गया कि 19 जुलाई को प्रधानमंत्री की हाई पॉवर सेलेक्शन कमेटी की मीटिंग हुई जिसमें मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन और भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने हिस्सा लिया जबकि विशेष रूप से आमंत्रित मल्लिकार्जुन खडगे ने भाग लेने से इनकार कर दिया। वहीं केंद्र की ओर से पक्ष रख रहे अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि सर्च पैनल के लिए जल्द ही फिर से मीटिंग की जाएगी। पीठ ने कहा कि केंद्र ने ये नहीं बताया कि लोकपाल की नियुक्ति कब तक होगी इसलिए चार हफ्ते में नया हलफनामा दाखिल हो।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कानून बने साढ़े चार साल बीत चुके हैं। इसे लेकर केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। अब या तो अदालत अवमानना की कार्रवाई करे या फिर  संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार का प्रयोग कर लोकपाल की नियुक्ति करे। हालांकि बेंच ने कहा कि वो समय अभी नहीं आया है।

17 जुलाई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि  19 जुलाई को प्रधानमंत्री की हाई पॉवर सेलेक्शन कमेटी की मीटिंग होगी और सर्च कमेटी बनाई जाएगी जो लोकपाल के नाम पर सुझाव देगी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उम्मीद है कि मीटिंग में लोकपाल के नाम को फाइनल किया जाएगा। केंद्र सरकार को 23 जुलाई को रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिया गया था।

2 जुलाई को लोकपाल की नियुक्ति पर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि दस दिनों के भीतर कोर्ट को बताए कि लोकपाल की नियुक्ति कितने वक्त में होगी।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर बानुमति की बेंच ने कहा था कि इस संबंध में कोई भी आदेश जारी करने से पहले पीठ केंद्र सरकार का पक्ष जानना चाहती है।

वहीं केंद्र की ओर से पक्ष रख रहे अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में जल्द ही चयन समिति की बैठक होने वाली है। लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने कहा कि जनवरी 2013 में लोकपाल बिल पास किया गया लेकिन साढे़ चार साल बीतने के बाद भी नियुक्ति नहीं की गई। अब वक्त आ गया है कि कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार का प्रयोग कर लोकपाल की नियुक्ति करनी चाहिए।

हालांकि पीठ ने कहा कि पहले वो केंद्र सरकार का पक्ष जानना चाहती है।

15 मई को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि लोकपाल चयन समिति में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी को "प्रतिष्ठित न्यायविद् " नियुक्त किया गया है। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक बेंच को सूचित किया था कि ये निर्णय 11 मई को लिया गया था, जिससे रोहतगी चयन समिति का हिस्सा बन गए, जिसकी अध्यक्षता प्रधान मंत्री करते हैं। समिति में प्रतिष्ठित न्यायविद्  का पद रिक्त पड़ा है क्योंकि वरिष्ठ वकील पीपी राव का पिछले साल सितंबर में  निधन हो गया था। एनजीओ कॉमन कॉज द्वारा दायर एक अवमानना ​​याचिका की सुनवाई के दौरान ये दलील दी गई जिसमें 27 अप्रैल के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद  भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल की नियुक्ति ना करने का मुद्दा उठाया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि मौजूदा लोकपाल अधिनियम कानून का एक व्यावहारिक हिस्सा है और इसके संचालन को लंबित रखने के लिए कोई औचित्य नहीं है। केंद्र ने 23 फरवरी को अदालत को सूचित किया था कि लोकपाल की नियुक्ति के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और  2014 में लोकसभा और लोकायुक्त अधिनियम को लेकर एक प्रक्रिया अधिसूचित कर दी गई थी।

 सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल द्वारा सूचित किए जाने के बाद नियुक्ति के लिए प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र को निर्देश दिया था। बताया गया था कि नियुक्ति पर चर्चा के लिए 10 अप्रैल कोएक बैठक पहले ही आयोजित की जा चुकी है।


 
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