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दिल्ली के LG कहते हैं, "मेरे पास शक्ति है, मैं सुपरमैन हूं लेकिन कूड़े की समस्या को हल करने के लिए कुछ भी नहीं करते हैं।” : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
13 July 2018 2:50 PM GMT
दिल्ली के LG कहते हैं, मेरे पास शक्ति है, मैं सुपरमैन हूं लेकिन कूड़े की समस्या को हल करने के लिए कुछ भी नहीं करते हैं।” : सुप्रीम कोर्ट
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"एलजी के इस मुद्दे पर 25 बैठकें आयोजित करने और कुछ क्षेत्रीय दौरे करने के बावजूद कुछ भी नहीं हुआ है और इन विचार-विमर्श में जो हुआ उसके बारे में  कोई भी अनुमान लगा सकता है। इन बैठकों के बावजूद  दिल्ली में कूड़े के पहाड़ हैं " सुप्रीम कोर्ट   

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल  बैजल को दिल्ली के  कचरे के निपटारे के संकट से निपटने के लिए सही काम करने और वैकल्पिक साइटों  के मुद्दे को हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाने पर फटकार लगाई है।

 सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बैजल के बीच अधिकारों की लड़ाई के उदाहरणों का भी इस्तेमाल किया कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया उस फैसले के बावजूद वह मालिक बने हुए हैं कि वह स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकते और निर्वाचित सरकार की सहायता और सलाह से बंधे हैं।

उनकी तरफ गुस्से में न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने एलजी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों से कहा , "आप कहते हैं कि मेरे पास सारी शक्ति है, मैं सुपरमैन हूं लेकिन आप कचरे के मुद्दे को हल करने के लिए कुछ भी नहीं करते हैं।"

 अमिक्स क्यूरी (अदालत की सहायता करने के लिए नियुक्त वरिष्ठ वकील)कॉलिन गोंजाल्विस के ये बताने के बाद एलजी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज हुआ कि  बैजल के कार्यालय से किसी ने भी  गाजीपुर  ( पूर्वी दिल्ली), भलस्वा (उत्तर) और ओखला (दक्षिण) स्थित शहर की तीन लैंडफिल साइटों को साफ करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए पिछली तीन बैठकों में भाग नहीं लिया था।

एलजी को बेंच के क्रोध का भी सामना करना पड़ा क्योंकि उन्होंने कहा कि शहर में कचरा निपटान सिविल निकायों का काम है और वह केवल निगरानी के प्रभारी हैं।

न्यायाधीशों ने वापस कहा , "यह कुछ भी नहीं है बल्कि जिम्मेदारी दूसरे पर थोपना है।  " एलजी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर 25 बैठकें आयोजित करने के बावजूद दिल्ली अभी भी कूड़े के पहाड़ों के नीचे दबी है।

पीठ ने एलजी कार्यालय को 16 जुलाई तक स्थिति से निपटने के लिए किए जाने वाले कदमों पर समय सीमा तय करने पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने एलजी के दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाया और कहा कि उनके कार्यालय से किसी भी अधिकारी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मुद्दे पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाग लेने के लिए जहमत नहीं उठाई।

"कुतुब मीनार की तरह कूड़े का पहाड़ “ 

पिछले साल  21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कचरे की भारी मात्रा के निपटान के लिए पर्याप्त उपाय करने के बजाय जमीन पर लैंडफिल साइटों पर डंपिंग करने पर फटकार लगाई थी।

"लैंडफिल साइट्स के पास कूड़े के ढेर  45 मीटर से ऊपर हैं।ये लगभग कुतुब मीनार जैसे  टॉवर हैं। कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है और इनमें से ये ढेर आधे से ज्यादा ऊंचाई के हैं।  यह एक खतरनाक स्थिति है इसके साथ कौन निपटने वाला है? आप (सरकार) को इस समस्या से निपटना होगा ", बेंच ने कहा था।

ये अवलोकन तब आए जब तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल रणजीत कुमार ने दिल्ली के मुख्य सचिव के लिए उपस्थित होकर इशारा किया कि ओखला, गाजीपुर और भलस्वा  में करीब तीन लैंडफिल साइटों पर 45 मीटर की ऊंचाई के कचरे के ढेर हैं। तब पीठ ने दिल्ली सरकार के  वकील राहुल मेहरा से पूछा था कि आप के पास दिल्ली में विधायक हैं जो लोगों के बीच कचरे के निपटारे के बारे में जागरूकता पैदा कर सकते हैं।

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