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सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया, CJI ही मास्टर ऑफ रोस्टर, शांति भूषण की याचिका का निपटारा किया

LiveLaw News Network
6 July 2018 7:56 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया, CJI ही मास्टर ऑफ रोस्टर, शांति भूषण की याचिका का निपटारा किया
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देश के मुख्य न्यायाधीश के मास्टर ऑफ रोस्टर के अधिकार के तहत सुप्रीम कोर्ट में केसों के आवंटन के खिलाफ पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण  द्वारा दाखिल याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए निपटारा कर दिया कि चीफ जस्टिस ही मास्टर ऑफ रोस्टर हैं। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की बेंच ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि मुख्य न्यायाधीश ही मास्टर ऑफ़ रोस्टर हैं। बेंच ने कहा कि संविधान मुख्य न्यायाधीश के मुद्दे पर चुप है लेकिन परपंरा और बाद के फैसलों में सभी द्वारा माना गया है कि चीफ जस्टिस बराबर में सबसे पहले हैं। वरिष्ठतम होने की वजह से उन्हें ये अधिकार है और वो प्रशासनिक हेड हैं। याचिकाकर्ता की ये बात ये स्वीकार नहीं की जा सकती कि केसों के आवंटन में चीफ जस्टिस का मतलब कॉलेजियम है।

बेंच ने अशोक पांडे मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला भी दिया है कि चीफ जस्टिस एक संस्थान हैं। 28 अप्रैल को देश के मुख्य न्यायाधीश के मास्टर ऑफ रोस्टर के अधिकार के तहत सुप्रीम कोर्ट में केसों के आवंटन के खिलाफ पूर्व  कानून मंत्री शांति भूषण  द्वारा दाखिल याचिका का अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने विरोध किया था। जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच में अपना रुख साफ करते हुए AG ने कहा था कि CJI ही मास्टर ऑफ रोस्टर हैं और ये कई फैसलों में कहा गया है। उन्होंने कहा कि CJI ही केसों का बंटवारा करे ये सबसे बेहतर विकल्प है क्योंकि अगर केसों के बंटवारे को कॉलेजियम तय करेगा तो अलग अलग जज कहेंगे कि ये केस उन्हें दिया जाए और इससे हितों का टकराव होगा। ये मांग अव्यवहारिक है और इसे माना नहीं जा सकता।

वहीं प्रशांत भूषण और वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे  ने कहा कि CJI का मतलब, कोलेजियम होता है और जिस तरह से जजों का चयन कॉलेजियम करता है वैसे ही केसों का बंटवारा भी कॉलेजियम करे। उन्होंने कहा कि या फिर फुल कोर्ट बैठे और केसों के बंटवारे का फैसला करे। इस दौरान जस्टिस ए के सीकरी ने कहा कि  उन्हें नहीं पता लेकिन कई बार जज शिकायत करते हैं कि CJI ने फलां केस उन्हें नहीं दिया। वो उस केस की सुनवाई चाहते थे।

AG ने तब जस्टिस करनन का हवाला देते हुए कहा कि जैसे वो जमानत मामलों की सुनवाई चाहते थे। वहीं जस्टिस भूषण ने कहा कि केसों के बंटवारे को लेकर समस्यओं के समाधान में कोई बात नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या संविधान में ऐसी कोई चाहत रखी गई है।इस सुनवाई के बाद जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

14 अप्रैल को जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने  पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ वकील शांति भूषण द्वारा दायर याचिका के संबंध में अटॉर्नी जनरल की सहायता के लिए अनुरोध किया था जिसमें ‘ मास्टर ऑफ रोस्टर’ के तौर पर  भारत के मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक प्राधिकरण का स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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