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कहीं भी कार्यकारी DGP की नियुक्ति ना हो, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को आदेश

LiveLaw News Network
3 July 2018 2:43 PM GMT
कहीं भी कार्यकारी DGP की नियुक्ति ना हो, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को आदेश
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देशभर में पुलिस सुधार को लेकर एक अहम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वो कहीं भी कार्यकारी पुलिस महानिदेशक (DGP)  नियुक्त नहीं करेंगे।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को कहा कि कार्यकारी डीजीपी नियुक्त करना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य डीजीपी का पद रिक्त होने से तीन महीने पहले UPSC को वरिष्ठ IPS अफसरों की सूची भेजेंगे और राज्य उसी अफसर को DGP बनाएंगे जिसका कार्यकाल दो साल से ज्यादा होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य कोर्ट के आदेशों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि ज्यादातर राज्य रिटायर होने की कगार पर पहुंचे अफसरों को कार्यकारी डीजीपी नियुक्त करते हैं।फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर नियमित डीजीपा बना देते हैं क्योंकि इससे अफसर को दो साल और मिल जाते हैं।

वेणुगोपाल ने कहा कि सिर्फ पांच राज्य तमिलनाडु, आंध्रा, राजस्थान, तेलंगाना और कर्नाटक ने ही 2006 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक DGP की नियुक्ति के लिए UPSC से अनुमति ली है जबकि 25 राज्यों ने ये नहीं किया। राज्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का मिसयूज कर रहे हैं इसलिए सुप्रीम कोर्ट को अपने आदेशों में संशोधन करना चाहिए।

वहीं अन्य याचिकाकर्ता बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वकील गोपाल शंकरनारायणन ने जोर दिया कि केंद्रशासित प्रदेश में पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति भी UPSC के माध्यम से होनी चाहिए।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट पुलिस सुधार पर दिए गए आदेश लागू नहीं करने पर दायर की गई अवमानना याचिका की सुनवाई कर रहा है।

याचिका में कहा गया है कि साल 2006 में पुलिस सुधार पर दिए गए अदालत के आदेश को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक लागू नहीं किया है।अदालत ने डीजीपी और एसपी का कार्यकाल तय करने जैसे कदम उठाने की सिफारिश की थी। साल 2006 में प्रकाश सिंह के मामले में अदालत द्वारा दिए गए आदेश को लागू नहीं किया गया है।

इस बीच बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने मॉडल पुलिस बिल 2006 को भी लागू करने की मांग की। पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी की अध्यक्षता वाली समिति ने इस बिल का मसौदा तैयार किया था। उपाध्याय के अलावा पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह ने भी 2014 में अवमानना याचिका दायर की थी।

पूर्व डीजीपी ने 1996 में जनहित याचिका दायर की थी जिसके कारण पुलिस सुधार बिल को तैयार किया गया था। अदालत ने प्रकाश सिंह और दूसरे डीजीपी एनके सिंह की याचिका पर 2006 में निर्देश दिया था। इसमें राज्य सुरक्षा अायोग का गठन किया जाना भी शामिल था। दरअसल 2006  में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो साल  होगा।

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