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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मास्टर प्लान मामले में केंद्र की संशोधन अर्जी ठुकराई, कहा जनता से आपत्तियां दर्ज करानी होंगी

LiveLaw News Network
24 May 2018 9:31 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मास्टर प्लान मामले में केंद्र की संशोधन अर्जी ठुकराई, कहा जनता से आपत्तियां दर्ज करानी होंगी
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दिल्ली में मास्टर प्लान- 2021 में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार की अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है।

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच ने गुरुवार को अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि वो इस मामले में फैसले को संशोधित करने से इनकार करते हैं।

दरअसल केंद्र सरकार ने अर्जी दाखिल कर कहा था कि मास्टर प्लान के संशोधन को लेकर पहले ही जनता से आपत्तियां मांगी गई थीं। अब दोबारा इसकी जरूरत नहीं है। इसलिए अदालत को अपने पुराने आदेश में संशोधन करना चाहिए।

दरअसल 15 मई को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को एक बड़ी राहत में सुप्रीम कोर्ट ने 6 मार्च के आदेश को आंशिक रूप से संशोधित किया था ताकि दिल्ली  मास्टर प्लान -2021 के संशोधन में और प्रगति हो सके।

 न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की एक पीठ ने केंद्र को प्रस्तावित परिवर्तनों पर आपत्तियों को आमंत्रित करने के लिए 15 दिनों की विंडो भी दी थी।कोर्ट ने केंद्र से दिल्ली के मास्टर प्लान (एमपीडी) में प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्तियों पर विचार करने और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय करने के लिए कहा था। साथ ही 15 दिनों में अवैध निर्माण को लेकर मोबाइल एप भी लांच करने के निर्देश दिए गए थे।

6 मार्च को बेंच ने दिल्ली विकास प्राधिकरण   द्वारा दिल्ली मास्टर प्लान 2021 में संशोधन करने के उद्देश्य से वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को राहत देने के उद्देश्य से आगे बढ़ने के प्रयास को रोक दिया था। प्रक्रिया तब रुक गई क्योंकि बेंच डीडीए से नाराज हुआ क्योंकि उसने 9 फरवरी को अदालत के आदेश के अनुसार हलफनामा दायर नहीं किया था।

 डीडीए ने बाद में संशोधन  के साथ आगे बढ़ने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, यातायात, भीड़ और अन्य सुरक्षा पहलुओं जैसे विभिन्न आकलनों को बेंच द्वारा रखे गए नौ सवालों के जवाब के जवाब में एक हलफनामा  दायर किया।  हलफनामे में यह भी कहा कि चूंकि उसने हलफनामा दायर किया है, इसलिए एमपीडी 2021 में संशोधन पर  रोक हटाई जानी चाहिए।

अदालत ने डीडीए से सभी निर्माण गतिविधियों की निगरानी और एमपीडी और भवन के उप-कानूनों के उल्लंघन के मामले में ज़िम्मेदारी तय करने के लिए पहले की गई कार्य योजना पर लगातार तीन दिनों में अग्रणी दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन देने के लिए कहा। कोर्ट ने डीडीए के लिए उपस्थित हुए

 अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से पूछा था कि क्या सरकारी अधिकारियों को निलंबन के तहत रखा जाएगा यदि वे अपना कर्तव्य करने में नाकाम रहे और अनधिकृत निर्माण उनके क्षेत्राधिकार के तहत क्षेत्रों में आते हैं।

वेणुगोपाल ने बेंच के समक्ष कार्य योजना दी और कहा कि अगर यह पाया गया कि सार्वजनिक कर्मचारियों की सहमति के कारण किसी क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण हुए हैं तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस पर  बेंच ने कहा, "लगभग 68 मीटर ऊंचा कूड़ा पड़ा है और आप इसके बारे में कुछ भी करने में सक्षम नहीं हैं। जहां भी आप कूड़ा डालना चाहते हैं, लोग आपत्ति  कर रहे हैं। स्थिति अपरिवर्तनीय है। पानी नहीं है, इसलिए लोग पानी नहीं पी सकते। प्रदूषण है, इसलिए लोग सांस नहीं ले सकते और कूड़ा है। शहर कहां जा रहा है?”  हम कहां जा रहे हैं ?”

कार्य योजना का जिक्र करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि अधिकारी स्थिति से निपटने के लिए "युद्ध स्तर” पर कदम उठा रहे है और एक " सुदृढ़ प्रणाली" स्थापित की जाएगी।

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