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मुवक्किल को मिले गुजारा भत्ते पर कमीशन वसूलना गैरकानूनी; उड़ीसा हाई कोर्ट ने वकील की अग्रिम जनामत याचिका रद्द की [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
4 May 2018 9:11 AM GMT
मुवक्किल को मिले गुजारा भत्ते पर कमीशन वसूलना गैरकानूनी; उड़ीसा हाई कोर्ट ने वकील की अग्रिम जनामत याचिका रद्द की [आर्डर पढ़े]
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कानूनी पेशे से जुड़े लोगों का इस तरह का बर्ताव जो कि नैतिकता के आदर्श को नहीं मानते, न्याय के प्रशासन को अवरुद्ध करते हैं, कोर्ट ने कहा

अपने मुवक्किल को ठगने का आरोप झेल रहे एक वकील की अग्रिम जमानत याचिका को उड़ीसा हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया। इस वकील पर अपने मुवक्किल को मिले स्थाई गुजारा भत्ता पर कमीशन वसूलने का आरोप है। कोर्ट ने उसकी इस गतिविधि को गैरकानूनी बताया।

वकील के खिलाफ आरोप यह है कि तलाक के एक मामले में वह अपने मुवक्किल के पति के साथ मिला हुआ था और महिला को धोखा देने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाए।

न्यायमूर्ति एसके साहू ने वकील की ओर से एक महिला मुवक्किल को जारी गैरकानूनी नोटिस पर गौर किया। इस नोटिस में कहा गया था कि उसके मुवक्किल ने उसको मिलने वाले स्थाई गुजारा भत्ता का 10 फीसदी देने का वादा किया था जो उसे अब देना चाहिए।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल में बी सुनीता बनाम तेलंगाना राज्य मामले में दिए गए फैसले का जिक क्रिया : “प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि पीड़ित ने याचिकाकर्ता में जो विश्वास जताया उसको उसने तोड़ा है। वह इस हद तक चला गया है कि उसने उसको मिलने वाले स्थाई गुजारा भत्ता में कमीशन का दावा किया है।”

शिकायत पर गौर करते हुए न्यायमूर्ति साहू ने कहा, “अगर पीड़ित ने याचिकाकर्ता को यह विशेष रूप से निर्देश दिया होता कि वह 50 लाख रुपए के गुजारा भत्ता के साथ तलाक का दस्तावेज तैयार करे तो याचिकाकर्ता का 35 लाख रुपए के गुजारा भत्ता वाला दस्तावेज बनाने का कोई कारण नहीं नजर आता और वह भी पीड़ित को बिना बताए।”

कोर्ट ने इस वकील की अग्रिम जमानत याचिका रद्द करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि शिकायतकर्ता की इस बात में सच्चाई है कि याचिकाकर्ता ने स्टाम्प पेपर पर उसके हस्ताक्षर के साथ उसका वकालतनामा प्राप्त किया और इस वकील का व्यवहार काफी संदेहास्पद है।”


 
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