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एनएलयू दिल्ली की छात्रा ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी में प्राप्त किया नौवां रैंक; अपनी विकलांगता को नहीं आने दिया आड़े

LiveLaw News Network
1 May 2018 9:04 AM GMT
एनएलयू दिल्ली की छात्रा ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी में प्राप्त किया नौवां रैंक; अपनी विकलांगता को नहीं आने दिया आड़े
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नेशलन लॉ स्कूल दिल्ली के पांच स्नातकों ने यूपीएससी 2017 की परीक्षा में सफल रहे हैं। इनमें एक छात्रा हैं सौम्या शर्मा जो सुन नहीं सकती हैं पर अपनी इस विकलांगता को उन्होंने पीछे छोड़ते हुए इस प्रतिष्ठित परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में नौवां स्थान प्राप्त करने में सफल रही। पर सौम्या इससे पहले भी कई वजहों से ख़बरों में रही हैं।

2016 में जब वह अंतिम वर्ष की छात्र थी, तब सौम्या ने दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा 2015 के बारे में दिल्ली हाई कोर्ट का ध्यान आकृष्ट कराया था जिसके विज्ञापन में इस परीक्षा के लिए ऊपरी आयु सीमा में 10 साल की छूट को सीमित कर दिया गया था। इस विज्ञापन में विकलांगों के लिए तीन प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को सिर्फ नहीं देख सकने वाले और चल सकने वाले लोगों तक ही सीमित कर दिया था। उसने मांग की थी कि यह लाभ उनको भी दिया जाए जो सुन नहीं सकते हैं।

उसका पत्र इतना आग्रही और उसकी दलील इतनी ठोस थी कि उसकी बात मानते हुए जो सुन पाने में असमर्थ थे उनको भी इसका लाभ दिया गया और वह भी बिना किसी मुकदमे का। मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी ने अपनी प्रशासनिक अधिकार का प्रयोग करते हुए इस बारे में आदेश दे दिया।

अब जब वह यूपीएससी की परीक्षा में सफल रही है, वह व्यवस्था में ज्यादा सकारात्मक परिवर्तन लाएगी, ऐसा माना जा सकता है। सौम्या को उसके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं!

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