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पीएनबी घोटाला : सुप्रीम कोर्ट 23 अप्रैल को AG और याचिकाकर्ता की दलीलें सुनेगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, केंद्र ने कहा ये कार्यपालिका का अधिकारक्षेत्र

LiveLaw News Network
9 April 2018 8:49 AM GMT
पीएनबी घोटाला : सुप्रीम कोर्ट 23 अप्रैल को AG और याचिकाकर्ता की दलीलें सुनेगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, केंद्र ने कहा ये कार्यपालिका का अधिकारक्षेत्र
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 मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि वो पीएनबी घोटाले की एसआईटी जांच और नीरव मोदी को वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाने की याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, पहले इस पर सुनवाई करेंगे।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने कहा कि इस पर 23 अप्रैल को सुनवाई होगी। हालांकि सीजीआई ने कहा, "प्रथम दृष्टया हमें लगता है कि अदालत इसकी निगरानी नहीं दे सकती।”

 पुणे के वकील विनीत ढांडा द्वारा दायर जनहित याचिका पर ये निर्णय लिया गया क्योंकि AG के के वेणुगोपाल ने ने तर्क दिया कि याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि जांच के दौरान  न्यायालय का हस्तक्षेप उचित कदम नहीं है क्योंकि  तब तक जांच शुरू हो गई थी।

 "इसके अलावा, ये मामला कार्यपालिका से  संबंधित हैं,” AG ने तर्क दिया।

AG ने कहा कि इस मामले से संबंधित 41 संपत्तियां जब्त की गई हैं, सीबीआई अदालत ने मोदी और उसके चाचा मेहुल चोकसी के  खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि 19 लोग गिरफ्तार किए गए हैं जिनमें से 8 सरकारी कर्मचारी हैं,  शेष निजी व्यक्ति  हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5000 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति  का पता लगाया है जो नीरव मोदी और उनके चाचा मेहुल चोकसी द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों  के माध्यम से बनाई गई थीं।

पिछली सुनवाई में भी AG ने ये मुद्दा उठाया था। "जब निजी पार्टियां इस तरह अदालत में आती हैं तो इसका औचित्य क्या है ... यह एक अभ्यास बन गया है ... जांच शुरू होने से पहले लोग अदालतों में आ रहे हैं। एक समानांतर निगरानी नहीं हो सकती .. यह जांचकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करता है, “ उन्होंने कहा था गत 16 मार्च को पीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई 9 अप्रैल तक टाल दी थी जब याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल गलत ब्रीफ  पढ़ रहे हैं।

दरअसल बेंच ने AG से सीलबंद कवर में  जांच की स्थिति की रिपोर्ट मांगी थी और उसी वक्त जब बेंच और वकील जे पी ढांडा के बीच तीखी बहस हुई। ढांडा मुंबई के वकील और अपने बेटे विनीत ढांडा के लिए पेश हुए।

21 फरवरी को भी नीरव मोदी-PNB मामले में सुप्रीम कोर्ट में हाई वोल्टेज सुनवाई देखने को मिली थी। हालांकि केंद्र सरकार ने इस मामले में दाखिल याचिका का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई  टाल दी थी।

 मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड की बेंच के सामने जैसे ही ये मामला आया, अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि वो इस याचिका का विरोध कर रहे हैं। एजेंसिया मामले की जांच कर रही हैं और कुछ गिरफ्तारियां भी की गई हैं। बेंच ने कहा कि इस मामले में बाद में सुनवाई करेंगे।

लेकिन याचिकाकर्ता विनीत ढांडा ने कहा कि कोर्ट ने कोई नोटिस आदि जारी नहीं किया है तो AG कैसे बीच में बोल सकते हैं ?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इसका जवाब दिया कि वो खुद आए हैं और क्या कोर्ट उनका पक्ष सुनने से इंकार कर सकता है ?

किसी भी देश में ऐसा नहीं होता।

लेकिन ढांडा अपनी बात पर अडे रहे, कहा ये गंभीर मामला है और 11400 करोड की बात है। देश के किसान लोन को लेकर परेशान हैं और कोई इतना लोन लेकर देश छोड गया।

इसका जवाब न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड ने दिया, “ ये पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटीगेशन लगती है। ये आजकल फैशन बन गया है। मीडिया में खबर आती है तो अगले ही दिन कोर्ट में याचिका दाखिल हो जाती है। ये दुरुपयोग है।”

लेकिन ढांडा ने कहा कि ये पब्लिसिटी इंटरेस्ट नहीं है। लोगों की भावनाएं इससे जुडी हुई हैं।

ये अपमानजनक बात है।

लेकिन न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि ऐसे मामलों में कोर्ट को सरकार को जांच करने का वक्त देना चाहिए। याचिका की पहली प्रार्थना भी जांच की बात कह रही है।

फिर चीफ जस्टिस ने कहा, “ अदालत भाषण से प्रभावित नहीं होती। भावना नहीं कानून का कोई मुद्दा होना चाहिए।”

दरअसल नीरव मोदी- पीएनबी में 11400 करोड रुपये की  धोखाधड़ी को लेकर दो जनहित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं। इनमें अदालत की निगरानी में  एसआईटी जांच की मांग की गई है। वकीलों द्वारा दाखिल याचिकाओं में दस करोड रुपये से ज्यादा के लोन पर गाइडलाइन जारी करने को कहा गया है और नीरव मोदी का जल्द प्रत्यार्पण किए जाने की मांग की गई है। पहली याचिका वकील विनीत ढांडा ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज कर कारवाई की जाए। केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि नीरव मोदी का जल्द प्रत्यार्पण किया जाए। दस करोड रुपये से ऊपर के बैंक लोन के लिए गाइडलाइन बनाई जाए। जो लोग लोन डिफाल्टर हैं उनकी संपत्ति तुरंत जब्त करने जैसे नियम बनाए जाएं। याचिका में मांग की गई है कि एक एक्सपर्ट पैनल का गठन हो जो बैंकों द्वारा 500 करोड व ज्यादा के लोन का अध्ययन कर इसे सावर्जनकि किया जाए। विजय माल्या, ललित मोदी आदि का हवाला देते हुए याचिका में ये भी कहा गया है कि बडे लोगों को राजनीतिक लोगों का सरंक्षण प्राप्त होता है इसलिए  वो पकड में नहीं आते। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के घोटालों ने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है

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