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पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में दखल देने से इंकार किया, बीजेपी को कहा वो राज्य चुनाव आयोग के पास जाने को स्वतंत्र

LiveLaw News Network
9 April 2018 7:08 AM GMT
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में दखल देने से इंकार किया, बीजेपी को कहा वो राज्य चुनाव आयोग के पास जाने को स्वतंत्र
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पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव के मामले में राज्य की बीजेपी इकाई की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस ए एम सपरे ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि वो पंचायत चुनाव में दखल नहीं देंगे। हालांकि बीजपी इस मुद्दे पर राज्य चुनाव आयोग से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है।

शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव के मामले में राज्य की बीजेपी इकाई की याचिका पर सुनवाई कर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान राज्य की बीजेपी इकाई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और पीएस पटवालिया

ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। कांग्रेस और बीजेपी आमतौर पर साथ नहीं होते लेकिन इस मुद्दे पर दोनों साथ हैं। कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव के खिलाफ
याचिका दाखिल की है। बीजेपी उम्मीदवारों को नामांकन भी भरने नहीं दिया जा रहा है। उनके साथ हिंसा हो रही है, धमकाया जा रहा है।पंचायत चुनाव को लेकर 70 हजार मतदान बूथों के लिए पर्याप्त सुरक्षा मुहैया हो। ऐसे में उन्हें व उनके परिवार को सुरक्षा दी जाए और ऑनलाइन नामांकन दाखिल करने की मंजूरी दी जाए और तब तक नामांकन की तारीख भी बढ़ाई जाए। उन्होंने हिंसा से जुड़ी कुछ तस्वीरें व वीडियो भी बेंच को दिए हैं।

दूसरी ओर पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि राज्य में बीजेपी की उपस्थिति जीरो है। ये याचिका सिर्फ मीडिया में आने के  लिए है। कोर्ट ने खुद ही कहा है कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरु होती है तो कोर्ट दखल नहीं देगा। ये आरोप गलत हैं और इस शिकायत को लेकर किसी भी उम्मीदवार ने शिकायत नहीं की। ऑनलाइन नामांकन को मंजूरी नहीं दी जा सकती क्योंकि रिटर्निग अफसर को प्रत्याशी और दस्तावेज की पडताल करनी पड़ती है।

 वही राज्य चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील अमरेंद्र शरण ने  भी बीजेपी की याचिका का विरोध किया।

इस दौरान केंद्र की ओर से पेश ASG तुषार मेहता ने कहा कि  ये चुनाव आयोग और राज्य के बीच का मामला है। केंद्र सरकार का दायित्व है कि वो चुनाव के लिए सुरक्षा प्रदान करे और इसके लिए केंद्र की तरफ से अर्धसैनिक बलों व सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है।

दरअसल पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने एक याचिका मेंसत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं पर उसके उम्मीदवारों को  राज्य में आगामी पंचायत चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

 याचिका में इसी साल मई के महीने में  होने वाले पंचायत चुनावों के सुचारु संचालन के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आग्रह किया गया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 9 अप्रैल है। मतदान 1, 3मई और 5 मई को आयोजित किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल की ओर से कहा गया है कि बीजेपी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं  को "  धमकाने और शारीरिक हिंसा के अधीन" किया जा रहा है ताकि उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोक दिया जा सके।

 "वर्तमान रिट याचिका में भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस माननीय न्यायालय की असाधारण शक्ति का आह्वान किया जा रहा है ताकि भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल के उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा की जा सके और वो नामांकन फॉर्म जमा कर और पंचायत चुनाव में भाग ले सकें  जो 01.05.2018, 03.05.2018 और 05.05.2018को पश्चिम बंगाल राज्य में निर्धारित हैं "

"यह प्रस्तुत किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के अधिकारोंका उल्लंघन किया जा रहा है और उत्तरदायी संख्या 6 (पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग) द्वारा ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारियों कोसहायक पंचायत चुनाव पंजीकरण अधिकारी के रूप में  नियुक्त किए गए लोगों द्वारा भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन फॉर्म देने से इनकार के माध्यम से तंग किया जा रहा है।

यह भी प्रस्तुत किया गया है कि उत्तरदायी संख्या 6 के कथित आचरण से उत्तरदायी राज्य अधिकारियों द्वारा एक  मनोवैज्ञानिक भय बनाने और उम्मीदवारों व अन्य प्रतिद्वंद्वी दलों के परिवारों को धमकाकर भय का माहौल बनाकर सहायता और उकसाया जा रहा है।”


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