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सुनिश्चित करें कि व्यक्तिगत बाल देखभाल योजनाएं उसकी भावना के तहत लागू हों : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
6 April 2018 2:37 PM GMT
सुनिश्चित करें कि व्यक्तिगत बाल देखभाल योजनाएं उसकी भावना के तहत लागू हों : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिला और बाल विकास मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया है कि व्यक्तिगत बाल देखभाल योजना सही भावना से  लागू की जाएं।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ को अमिक्स क्यूरी अपर्णा भट्ट ने सूचित किया कि पिछले साल मई में न्यायालय के फैसले में वर्णित व्यक्तिगत बाल देखभाल योजना को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है। इसका संज्ञान  लेते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया, "बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग और बाल अधिकारों केलिए राज्य आयोग और गैर-सरकारी संगठनों की सहायता से महिला और बाल विकास मंत्रालय को ओरियंटेशनकार्यक्रमों को संचालित करना चाहिए ताकि आदर्श नियमों के फॉर्म नंबर 7 के तहत व्यक्तिगत बाल देखभाल योजना को उसकी सही भावना के साथ लागू किया जा सके। हमने पहले ही यह बताया है कि व्यक्तिगत बाल देखभाल योजना एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है और इसे यांत्रिक रूप से या आकस्मिक तरीके से तैयार नहीं करना चाहिए। "

भट्ट ने यह भी बताया कि एकीकृत बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के तहत निधियों के उपयोग की योजनाएं प्रस्तुत नहीं की गईं। इस मौके पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने अदालत को सूचित किया कि इसे लेकर सूचना भेजी गई है और राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा इस तरह के धन के उपयोग के लिए योजनाएं प्राप्त की गई हैं।

सिंह ने आगे कहा कि परियोजना स्वीकृति बोर्ड द्वारा अप्रैल में प्रस्तुत योजनाओं की जांच करने और उनकी व्यवहार्यता का परीक्षण करने की संभावना है।

इन सबमिशनों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इस मामले को 11 जुलाई, 2018 को निर्देशों के लिए सीमित करने के लिए कहा है।

  तमिलनाडु राज्य के अनाथालयों में बच्चों के शोषण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मई 2017 में, अनाथालयों और बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे।कोर्ट ने सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि वर्ष के अंत से पहले सभी बाल देखभाल संस्थानों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाए। इसने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:




  • यह सुनिश्चित करें कि सभी बाल देखभालसंस्थानों के पंजीकरण की प्रक्रिया 31 दिसंबर, 2017 तक सकारात्मक रूप से पूरी हो। पूरे डेटा की पुष्टि और मान्यता हो।

  • सूचना ( संस्थानों से संबंधित) सभी संबंधित अधिकारियों के साथ उपलब्ध होनी चाहिए। पंजीकरण प्रक्रिया में देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले सभी बच्चों का डेटा बेस भी शामिल होना चाहिए, जो हर महीने अपडेट होना चाहिए। डेटाबेस को बनाते हुएगोपनीयता और निजता के मुद्दों को संबंधित अधिकारियों द्वारा ध्यान में रखा जाना चाहिए

  • 31 जून, 2017 को या इससे पहले जे जे अधिनियम और आदर्श नियमों के अनुसार और आवश्यक अनुसार देखभाल के न्यूनतम मानक लागू करें

  • बाल देखभाल संस्थानों के नियमित निरीक्षण और इस तरह के निरीक्षणों की रिपोर्ट तैयार करने के लिए जे जे अधिनियम और आदर्श नियमों द्वारा आवश्यक निरीक्षण समितियों को स्थापित करना ताकि इन संस्थानों में बच्चों की रहने की स्थिति सकारात्मक परिवर्तन से गुजर सके। इन निरीक्षण समितियों का गठन 31 जुलाई, 2017 को या उससे पहले किया जाना चाहिए।

  • इन निरीक्षण समितियों को अपने अधिकार क्षेत्र में बाल देखभाल संस्थानों को31 दिसंबर, 2017 को या इससे पहले निरीक्षण का संचालन करना चाहिए और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संबंधित सरकार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।


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