Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

हरियाणा के पानी छोड़ने के बाद दिल्ली सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 16 अप्रैल तक टाली

LiveLaw News Network
3 April 2018 11:30 AM GMT
हरियाणा के पानी छोड़ने के बाद दिल्ली सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 16 अप्रैल तक टाली
x

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई को 16 अप्रैल तक स्थगित कर दिया है जिसमें दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने हरियाणा को हर दिन 450 क्यूसेक पेयजल की आपूर्ति करने के निर्देश देने की मांग की थी। दिल्ली सरकार का कहना है कि राजधानी में राष्ट्रीय स्तर पर "जल संकट" है और हरियाणा को

 दिल्ली के वजीराबाद बैराज में पेयजल आपूर्ति करनी चाहिए।

 दिल्ली जल बोर्ड के लिए पेश पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील  मुकुल रोहतगी और  वकील सुमित पुष्करना ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ से कहा कि वे 'इंतजार और निगरानी' नीति अपना रहे हैं, जिसके बाद हरियाणा ने कुछ पानी छोड़ा है। दो दिन पहले राज्यों के बीच मुख्य सचिव

स्तरीय वार्ता भी हुई है। बेंच ने उनके अनुरोध पर सुनवाई स्थगित कर दी।

उन्होंने कहा कि वार्ता जारी है और इस मुद्दे का समाधान हो सकता है। याचिका में दिल्ली सरकार ने हरियाणा सरकार पर पानी की आपूर्ति के संबंध में 1996 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।  कहा गया है, "यमुना में हरियाणा द्वारा पानी की आपूर्ति को रोकने के कारण दिल्ली एक गंभीर जल संकट के दौर में है, जो कि दिल्ली में पीने के प्रयोजनों के लिए है।”

दिल्ली जल बोर्ड द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि  हरियाणा वजीराबाद जलाशय में पीने के पानी की आपूर्ति करने के लिए इस अदालत के निर्देशों को नजरअंदाज कर रहा है और ऊपरी राज्य होने का अनुचित फायदा उठा रहा है। यमुना को दिल्ली की तरफ लगभग

सूखी नदी बना दिया गया है जहां दिल्ली में पानी नहीं है और वजीराबाद जलाशय में पीने के पानी के लिए पानी की आपूर्ति में रुकावट हो रही है। दिल्ली में आने वाली गर्मियों में पानी का भारी संकट होने वाला है।

" याचिका उच्चतम न्यायालय से आग्रह करती है कि हरियाणा को 450 क्यूसेक प्रतिदिन पेयजल दर की दैनिक आपूर्ति सुनिश्चित करने, हर समय वजीराबाद बैराज / जलाशय को पूरा करने और एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा वजीराबाद बैराज में पानी की मात्रा और गुणवत्ता की निगरानी के लिए निर्देश जारी किए जाने चाहिएं।”

 डीजेबी ने कहा है कि यमुना के स्तर में गिरावट के कारण  इसके जल उपचार संयंत्रों ने या तो कामकाज को बंद कर दिया है या क्षमता कम हो गई है। यह कहा गया है कि हरियाणा भी प्रदूषित पानी जारी करता है जिसे ट्रीट नहीं किया जा सकता। नतीजतन बोर्ड राष्ट्रीय आपूर्ति के लिए राशनिंग कर रहा है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी के बड़े हिस्से में पानी की कमी हो सकती है।

Next Story