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गोरखपुर अस्पताल में मौत: ऑक्सीजन सप्लायर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
2 April 2018 5:22 AM GMT
गोरखपुर अस्पताल में मौत: ऑक्सीजन सप्लायर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है जिसमें पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड  के मालिक की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था।इसी फर्म  ने गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति की थी, जहां पिछले साल कई बच्चों की मृत्यु हुई थी।

 मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 12 हफ्तों के अंदर मनीष भंडारी की अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करे।

इस मामले को अब 9 अप्रैल को सूचीबद्ध किया गया है।

गौरतलब है कि अगस्त, 2017 में एक हफ्ते में बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में 60 से अधिक बच्चे जिनमें से ज्यादातर शिशु थे, की मृत्यु हो गई थी।

इसके बाद आरोप लगाया गया था कि विक्रेता को बिलों का भुगतान न किए जाने पर ऑक्सीजन की आपूर्ति में विघटन के कारण ये मृत्यु हुई थी।

इसके बाद,इस घटना की जांच करने वाले यूपी के मुख्य सचिव राजीव कुमार की कमेटी ने मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ राजीव मिश्रा, एनीथिसिया HOD  बाल चिकित्सा विभाग डॉ सतीश, 100 बिस्तरों वाले एईएस वार्ड के प्रभारी डॉ कफील खान और पुष्पा सेल्स  के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की।

उच्च न्यायालय ने पिछले महीने भंडारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि हिरासत में लेकर पूछताछ की अभी भी आवश्यकता हो सकती है। पीठ ने नोट किया था कि पुष्पा सेल्स चिकित्सा ऑक्सीजन के लिए एक लाइसेंसधारी विक्रेता नहीं था और इस तरह की आपूर्ति के लिए अनुबंध में में कई अनियमितताओं के बारे में भी जानकारी दी गई थी।

इसलिए अदालत ने कहा, “ यह न्यायालय हालांकि इस तथ्य की अनदेखी नहीं सकता कि इस अपराध से उत्पन्न होने वाले मुद्दे व्यक्तिगत अवरोधों या दुर्व्यवहारियों के लिए सीमित नहीं हैं। दो प्राथमिक मुद्दे जो रिकॉर्ड से

 खड़े होते हैं (ए) एक अनिवार्य और जीवनरक्षक दवा ऑक्सीजन की आपूर्ति की रुकावट और (बी) निविदा को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया और उसके बिना किसी लाइसेंसधारी विक्रेता को अंतिम अवार्ड। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने नोट किया कि कार्यवाही के इस चरण में जहां इन पहलुओं की जांच चल रही है, अदालत जो अंततः संज्ञान लेगी, कानून द्वारा अन्य दंड प्रावधानों को जोड़ने पर विचार करने के लिए प्रतिबंधित नहीं होगी यदि जांच के दौरान सबूत और सामग्री सामने आती हैं तो।  "


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