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SC ने अपने आदेश का एक हिस्सा वापस लिया जब वादी ने कहा कि उनके वकील ने HC में बिना निर्देश बयान दर्ज किए [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
31 March 2018 5:07 AM GMT
SC ने अपने आदेश का एक हिस्सा वापस लिया जब वादी ने कहा कि उनके वकील ने HC में बिना निर्देश बयान दर्ज किए [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में किरायेदार  से संबंधित एक मामले में अपने आदेश का एक हिस्सा वापस ले लिया जब  मकान मालिक ने कहा कि उनके वकील ने बिना उनके निर्देश के हाई कोर्ट के सामने बयान दिया था।

इस मामले में उच्च न्यायालय ने किराया नियंत्रण अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें किरायेदार को दुकान खाली करने को कहा गया था। ये फैसला तब दिया गया जब मकान मालिक की ओर से पेश वकील ने बयान दिया कि अगल किरायेदार 10,000 प्रति माह दर पर किराया चुकाता है तो दुकान खाली करने की जरूरत नहीं है। हालांकि  उच्च न्यायालय ने किरायेदार को इस शर्त पर दुकान बनाए रखने की इजाजत दी कि वह  प्रति माह 6,000 रुपये मकान मालिक को किराया देगा।

मकान मालिक ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय के सामने इस मामले में कोई रियायत नहीं की थी। हालांकि  न्यायमूर्ति आर बानुमती की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस सबूत को स्वीकार नहीं किया और कहा: "विवाद से इस कारण से सहमत नहीं है कि उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ता के लिए पेश वकील द्वारा प्रस्तुत किए गए बयानों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया है- मकान मालिक ने कहा है कि उन्हें किरायेदार के पास दुकान को बनाए रखने के लिए कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते किरायेदार 10,000 रुपये किराया भुगतान करे। " अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया क्योंकि उच्च न्यायालय के निर्देश के तहत किरायेदार ने बकाए का भुगतान किया था। मकान मालिक ने फिर से आदेश को वापस लेने के लिए एक आवेदन पत्र दाखिल किया और इस बार तर्क दिया कि उन्होंने अपने वकील के खिलाफ भारत की बार काउंसिल के सामने पहले ही शिकायत दर्ज की है कि उन्होंने बिना निर्देश के  उच्च न्यायालय में बयान दिए।

अदालत ने मामले में आदेश को संशोधित कर दिया और केस में फिर से विचार करने के लिए इस मामले को उच्च न्यायालय के पास भेज दिया।


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