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गलती से हिरासत में रखे गए व्यक्ति की पत्नी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया रिहा करने का आदेश [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
23 March 2018 9:25 AM GMT
गलती से हिरासत में रखे गए व्यक्ति की पत्नी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया रिहा करने का आदेश [आर्डर पढ़े]
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को गलती से हिरासत में रखे गए एक व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया। इस व्यक्ति की पत्नी ने अपने पति की रिहाई को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।

न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और पीडी नाइक की खंड पीठ ने इस याचिका की सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के वकील रिजवान मर्चेंट ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 41 का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 16 मार्च को नोटिस जारी किया गया और अगले दिन उसे हिरासत में ले लिया गया।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने पुलिस के नोटिस को लेने से इनकार कर दिया था।

कोर्ट ने एपीपी जेपी याग्निक के पंचनामे को पढ़ने के बाद कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने पुलिस का नोटिस लेने से इनकार कर दिया था। लेकिन याग्निक ने इस बात को साबित करने के लिए पूरी फाइल जमा करने के लिए ज्यादा वक़्त की मांग की जो कोर्ट ने उन्हें दे दिया।

अगले दिन कोर्ट ने पूरी फाइल देखी और निष्कर्षतः कहा :

पंचनामा और संबंधित दस्तावेज नोटिस में कही गई बातें इस आरोप से कहीं मेल नहीं खाता कि याचिकाकर्ता के पति ने नोटिस लेने से मना कर दिया। इस स्थिति में प्रतिवादियों ने जो किया उससे अनुच्छेद 21 का उल्लंघन हुआ है और यह कार्रवाई कठोर है”

कोर्ट ने इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे जिसने इस व्यक्ति को गलती और गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लिया। कोर्ट ने हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बुधवार को ही 5 बजे शाम को रिहा करने का आदेश दिया।


 
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