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संपादकीय

ब्रेकिंग : अब चुनावी हलफनामे में सिर्फ प्रत्याशी ही नहीं बल्कि जीवन साथी और आश्रितों की आय के स्त्रोत का भी खुलासा हो: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
16 Feb 2018 6:56 AM GMT
ब्रेकिंग : अब चुनावी हलफनामे में सिर्फ प्रत्याशी ही नहीं बल्कि जीवन साथी और आश्रितों की आय के स्त्रोत का भी खुलासा हो: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सासंद और विधायक का चुनाव लडते वक्त चुनावी हलफनामे में उम्मीदवार को अपनी, अपने जीवनसाथी आश्रितों की आय के स्रोत का खुलासा भी करना होगा।

जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने शुक्रवार को NGO लोक प्रहरी की याचिका पर ये फैसला सुनाया।

जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा ,” याचिका में प्रार्थना को अनुमति दी जाती है। केवल वो जिनमें का कानून में संशोधन की जरूरत है वो मंजूर नहीं की जा रही हैं और ये संसद पर है कि वो इस रर फैसला ले।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने लोक प्रहरी एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर 12 सितंबर 2017 को फैसला सुरक्षित रखा था।  लोक प्रहरी एनजीओ ने याचिका दाखिल कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव सुधारों को लेकर आदेश दे कि नामांकन के वक्त प्रत्याशी अपनी और अपने परिवार की आय के स्त्रोत का खुलासा भी करे।

अप्रैल 2017 में अपने हलफनामे में चुनाव सुधारों को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नामांकन के वक्त प्रत्याशी द्वारा अपनी, अपने जीवन साथी और आश्रितों की आय के स्त्रोत की जानकारी जरूरी करने को केंद्र तैयार है। केंद्र ने  कहा कि काफी विचार करने के बाद इस मुद्दे पर नियमों में बदलाव का फैसला लिया गया है।  हलफनामे में केंद्र ने ये भी कहा कि उसने याचिकाकर्ता की ये बात भी मान ली है जिसमें कहा गया था कि प्रत्याशी से स्टेटमेंट लिया जाए कि वो जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत अयोग्य करार देने वाले प्रावधान में शामिल नहीं है।

हालांकि अपने हलफनामे में केंद्र इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहा कि कोई जनप्रतिनिधि अगर किसी सरकारी या पब्लिक कंपनी में कांट्रेक्ट वाली कंपनी में शेयर रखता है तो उसे अयोग्य करार दिया जाए। केंद्र ने कहा कि ये पालिसी का मामला है। हालांकि केंद्र ने नामांकन में गलत जानकारी देने पर प्रत्याशी को अयोग्य करार देने के मामले का विरोध किया, कहा ये फैसला लेने का अधिकार विधायिका का है। इससे पहले चुनाव आयोग भी इस मामले में अपनी सहमति जता चुका है। चुनाव आयोग ने कहा था कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए नियमों में ये बदलाव जरूरी है।

अभी तक के नियमों के मुताबिक प्रत्याशी को नामांकन के वक्त अपनी, जीवनसाथी और तीन आश्रितों की चल-अचल संपत्ति व देनदारी की जानकारी देनी होती है। लेकिन इसमें आय के स्त्रोत बताने का नियम नहीं है।

इस दौरान दो चुनावों के बीच नेताओं की संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि को लेकर दाखिल अर्जी  पर CBDT ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया था।

हलफनामे में CBDT ने कहा कि आयकर विभाग ने जांच की तो पाया कि 26 लोकसभा सांसदों में से 7 लोक सभा सांसदों की संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि हुई है।

CBDT ने कहा कि आयकर विभाग 26 लोक सभा सांसदों में से 7 सांसदों की संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी लेकर आगे की जांच करेगा।

CBDT ने कहा कि 257 विधायकों में से 98 विधायकों की संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी पर आगे जांच की जा रही है।

CBDT ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि याचिकाकर्ता की तरफ से आरोप लगाया गया है कि 26 लोक सभा सांसद, 11 राज्य सभा सांसद और 257 विधायकों की संपति में दो चुनावों के बीच बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

CBDT ने कहा कि वक़्त वक़्त पर चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों को वो जांच की प्रगति रिपोर्ट साझा करते रहे है। माना जा रहा है कि मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान CBDT उन सांसदों और विधायकों के नामों की रिपोर्ट सीलकवर में दाखिल कर सकता है जिनकी सम्पति में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

6 सितंबर 2017  को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उन विधायकों और सांसदों की जानकारी मांगी थी जिनके ख़िलाफ़ CBDT जांच कर रही है और बेहद कम समय में उनकी संपत्ति तेज़ी से बढ़ी है।

जस्टिस जे चेलामेश्लर की अगवाई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को कहा था कि ये बताएं कि जांच कहाँ तक पहुँची है ? आपने क्या कारवाई की है ? कोर्ट ने इसका हलफनामा दायर कर करने को कहा था कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार नाम सार्वजनिक नही करना चाहती तो सील बंद लिफ़ाफ़े में कोर्ट में दायर कर सकती है।

दरअसल केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि CBDT उन विधायकों और सांसदों की जांच कर रही है जिनकी आय और संपत्ति में कम समय में ज़्यादा इज़ाफ़ा हुआ है।


 
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