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रेप की शिकार 8 महीने की बच्ची को एम्स शिफ्ट किया गया, सर्जरी के बाद हालत स्थिर

LiveLaw News Network
1 Feb 2018 2:33 PM GMT
रेप की शिकार 8 महीने की बच्ची को एम्स शिफ्ट किया गया, सर्जरी के बाद हालत स्थिर
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हाल ही में दिल्ली में चचेरे भाई द्वारा रेप की शिकार  8 महीने की बच्ची को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में स्थानांतरित कर दिया गया है। वह अब एम्स डॉक्टरों की पूर्ण देखभाल में रहेगी।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पीएस नरसिम्हा ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को ये बताया।

 दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (डीएलएसए) और एम्स की ओर से  दो स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए एएसजी ने चीफ जस्टिस  दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच  को बताया कि पीडित परिवार को 75,000 रुपये का तत्काल मुआवजा दिया गया है।

नरसिम्हा ने कहा, "डॉक्टरों की एक टीम ने कलावती सरन चिल्ड्रन अस्पताल का दौरा किया था जहां लड़की को पहले भर्ती कराया गया था और लड़की की स्वास्थ्य स्थिति की जांच करने के बाद उसे एम्स में स्थानांतरित कर दिया गया था।”

याचिकाकर्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह के घृणित और क्रूर अपराधों में मृत्यु दंड की मांग की, जहां पीड़ित 10 वर्ष से कम उम्र की हैं। POCSO अधिनियम के तहत अधिकतम सजा जीवन कारावास है और अदालत को भी सजा की वृद्धि पर विचार करना चाहिए जिसका एएसजी द्वारा विरोध किया गया कि मृत्यु दंड हर समस्या का उत्तर नहीं है।

वकील ने POCSO अधिनियम के तहत बच्चों को शामिल करने वाले मामलों की जांच और परीक्षण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए या नहीं, इस बड़े मुद्दे पर एक आदेश देने के लिए भी बेंच से अनुरोध किया।

बेंच ने उनके निवेदन पर सहमति व्यक्त की और 12 मार्च को इस मामले की सुनवाई तय की।

इस बीच, अदालत ने याचिकाकर्ता से बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के संबंध में पूरे भारत में विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों का ब्योरा देने को कहा।

एम्स रिपोर्ट के अनुसार, तीन डॉक्टरों की एक टीम - डॉ राजेश कुमारी, डॉ देवेन्द्र कुमार यादव और डॉ अशोक के देवरारी - बुधवार को कलावती सरन चिल्ड्रन अस्पताल गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है,  "कुल मिलाकर बच्चा स्थिर दिखता है और शल्य चिकित्सा के बाद पुन: सर्जिकल घाव को नियमित रूप से सड़न से रोकने की आवश्यकता होगी और जरूरत पड़ने पर आगे के प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी।   " दरअसल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट  ने एम्स को निर्देश दिया था कि वे दो डॉक्टर अस्पताल भेजें और देखें की बच्ची का उपचार सही है या नहीं और लगे तो तुरंत उसे एम्स में भर्ती किया जाए ताकि उसकी बेहतर देखभाल और उपचार किया जा सके।

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